*अरविंद_केजरीवाल_के_आधिकारिक_आवास_पर_खर्च_हो_रहे_है_45_करोड़_रूपए*

03 मई 2023-(#अरविंद_केजरीवाल_के_आधिकारिक_आवास_पर_खर्च_हो_रहे_है_45_करोड़_रूपए)–
आम आदमी पार्टी अन्ना हजारे आन्दोलन की देन है। हालांकि अन्ना सक्रिय राजनीति मे आने के खिलाफ थे लेकिन अरविंद केजरीवाल ने उनकी खिलाफत की अनदेखी करते हुए राजनीति मे कदम आगे बढ़ाया और आज वह एक राष्ट्रीय पार्टी के सुप्रीमो है। स्मरण रहे अन्ना आन्दोलन भ्रष्टाचार और सरकार मे हो रही फिजूल खर्ची के खिलाफ था। इन मुद्दो के चलते देश मे सशक्त लोकपाल एक्ट की मांग की गई थी। खैर लोकपाल जैसा बनना चाहिये था वैसा नहीं बना। अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया और दिल्ली को अपना पहला कर्म क्षेत्र चुना। दिल्ली मे उन्होने भ्रष्टाचार और राजनीतिज्ञों की सरकारी फिजूल खर्ची और शानो-शौकत को मुद्दा बनाया। उन्होने लोकतंत्र मे सादगी वाले जीवन की वकालत की और स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री को छोटे निवास मे रहकर, छोटी गाड़ी मे सफर कर और कम से कम सुरक्षा लेकर एक आदर्श स्थापित करना चाहिए। शुरुआत मे उन्होने ऐसा किया भी। पहली बार जीतने के बाद वह अपनी निजि छोटी गाड़ी मे शपथ समारोह मे पहुंचे थे। उस समय दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित उनकी मुख्य प्रतिद्वंदी थी और उनके खिलाफ उन्होने विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव मे उनके एक भाषण के अंश इस प्रकार थे ” शीला दीक्षित के घर दस एसी लगे है। मैने सुना है कि उनके वाशरूम मे भी एसी लगा हुआ है। कौन भरता है उनके एसी का बिल ? मै और आप भरते है”। उनके इस तरह के ताबड़तोड़ हमले से माहौल बना और शीला दीक्षित चुनाव हार गई। अरविंद ने रिकॉर्ड मतो से जीत हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया।
खैर जल्दी ही अरविंद केजरीवाल ने अपना रंग बदला और अपनी विचारधारा भी बदल दी। वह अपनी मनमर्जी करने लगे और सबसे पहले अपने उन सहयोगियों को हाशिए पर धकेल दिया जो उनसे सवाल कर सकते थे और वह आप पार्टी के संयोजक से सुप्रीमो बन गए। छोटी गाड़ी की वकालत करने वाले केजरीवाल सबसे छोटे राज्य के बतौर मुख्यमंत्री दो दर्जन गाडियों के साथ चलने लगे। वीआईपी कल्चर के विरोधी अरविंद के साथ अब दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त लगभग सौ जवान पंजाब पुलिस के भी तैनात रहते है। अन्ना आन्दोलन के समय से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक राजनेताओ के बड़े घर उनकी आलोचना के केन्द्र मे रहते थे। अब बड़ा घर उनके आकर्षण के केन्द्र मे आ गया है। प्रतिष्ठित दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास परिसर पर ” सौंदर्यकरण” पर 45 करोड़ रूपए खर्च किए गए है। विरोध पक्ष का आरोप है कि आवास के “सौंदर्यकरण” की योजना उस समय बनाई गई थी जब दिल्ली मे कोविड महामारी अपने सबसे भयावह रूप मे थी। मेरी समझ मे केजरीवाल का आलीशान महल नुमा घर और आलीशान जीवन शैली उनके सार्वजानिक जीवन के शुरूआती भाषणों और विचारों के विपरीत है। मेरी समझ मे उनको राजनीति मे अमर होने का भ्रम हो गया लगता है। मेरे विचार मे इस सृष्टी मे कोई अमर नहीं है और राजनीति मे तो वोटर का कोई भरोसा नहीं कि वह कब चढ़ा दें और कब उतार दें। अन्त मे अरविंद केजरीवाल की जीवनशैली देख यही कहा जा सकता है कि “जब भगवान हुस्न देता है तो नजाकत आ ही जाती है”।

#आज_इतना_ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।