*विनेश_फोगाट_ओलंपिक_से_बाहर_देश_मे_निराशा_का_महौल* महेंद्र नाथ सोफत पूर्व मंत्री*


9 अगस्त 2024–(#विनेश_फोगाट_ओलंपिक_से_बाहर_देश_मे_निराशा_का_महौल)–

भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट ओलंपिक कुश्ती के फाइनल मे पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनकर इतिहास रच चुकी है। वह गोल्ड लकपने वाली है ऐसी उम्मीद सारे देश को थी। यह बात दर्ज करने काबिल है कि उन्होने फाइनल राउंड तक पहुंचने के क्रम मे मौजूदा चैम्पियन जापान की युई सुसाकी को हराया था विनेश की इस जीत के बाद सारे देश मे जबरदस्त उत्साह और एक उत्सव जैसा माहौल था, लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण घटनाक्रम के चलते फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन निर्धारित सीमा से सौ ग्राम अधिक निकला और उन्हे अयोग्य घोषित कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनका वजन कम करने की कोशिशे की गई थी जो सफल नहीं हो सकी थी। देश ने उनसे जितनी बड़ी उम्मीद लगाई थी उनके बाहर होने से उतनी ही निराशा फैल गई। इसके साथ ही इस सारे प्रकरण पर राजनीति होने लगी। आज का सुचना और अफवाह फैलाने का जबरदस्त माध्यम सोशल नेटवर्किंग एक्शन मे आ गया। कोई इस सारे मामले को कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के प्रकरण के साथ जोड़ने लगा तो कुछ लोग इसमे षड्यंत्र देखने लगे। एक कथित बड़े यूट्यूबर ने तो नीता अंबानी पर भी अप्रत्यक्ष तंज कसने की कोशिश की।स्मरण रहे नीता अंबानी ओलंपिक संघ की सदस्य है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन के इस ब्यान से कि सरकार विनेश को न्याय दिलाने की कोशिश करे सरकार को इस मामले मे कठघरे मे खड़ा करने की कोशिश है। इस प्रकरण से सारा देश दुखी और क्षुब्ध है, लेकिन निश्चित तौर पर सबसे दुखी तो विनेश फोगाट है जिनकी कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया है। देश के प्रधानमंत्री ने उन्हे चैम्पियन का चैम्पियन कहकर उनके दुख को कम करने की कोशिश की है। हरियाणा सरकार ने उनको वही सम्मान देने की घोषणा की है जो ओलंपिक के रजत मैडल विजेता को मिलता है। मै खेल और खेल नियमो का जानकार नहीं हूँ। मैने मीडिया विशेषकर सोशल नेटवर्किंग पर फैलाई जाने वाली भ्रांतिया को दूर करने के लिए अपने दोस्त,खेल के जानकार और खेल जगत के वरिष्ठ पत्रकार रहे मनमोहन सिंह से तीन सवाल पूछे
(1) क्या विनेश फोगाट किसी षड्यंत्र का शिकार हुई है ?
(2) क्या विनेश फोगाट के बाहर होने के राजनैतिक कारण हो सकते है ?
(3) क्या सरकार का इस मामले मे हस्तक्षेप उपेक्षित है जिससे फोगाट को न्याय मिल सके ?
उनके तीनो प्रश्नो के उत्तर “नहीं” थे। अंत मे यही कहा जा सकता कि हम गोल्ड मैडल चूक गए यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन यह खेल का हिस्सा है।

#आज_इतना_ही।