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कांग्रेस_को_ईवीएम_को_लेकर_सहयोगी_दलों_ने_दिया_झटका

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18 दिसंबर 2024–(#कांग्रेस_को_ईवीएम_को_लेकर_सहयोगी_दलों_ने_दिया_झटका)–

कांग्रेस ईवीएम के प्रयोग के विरोध मे बहुत मुखर है। लोकसभा चुनाव के परिणामो से खुश कांग्रेस ने ईवीएम को लगभग स्वीकार कर लिया था और अपनी सीटो मे बढ़ोतरी और भाजपा द्वारा स्पष्ट बहुमत न हासिल करने का जश्न भी मना लिया था, लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा की अनापेक्षित हार के बाद एक बार फिर कांग्रेस ने ईवीएम पर हमला बोल दिया और इसे हटाने और वापस बैलेट पेपर पर जाने की मांग करते हुए ईवीएम के विरोध मे मुखर हो गई। स्मरण रहे पहली बार वायनाड से ईवीएम प्रक्रिया के अंतर्गत चार लाख से अधिक मतों से जीत कर सांसद बनी प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि हिम्मत है तो बैलेट पर चुनाव करवा कर जीत कर दिखाओ। मेरी समझ मे उनकी बड़ी जीत और उनकी चुनौती मे जबरदस्त विरोधाभास है। खैर हार से विचलित होकर कांग्रेस हार का सारा ठीकरा ईवीएम पर फोड़कर मन को समझा रही है, लेकिन इस सारे मामले मे कांग्रेस नेतृत्व अपने सहयोगी दलों का समर्थन जुटाने मे फेल हो रही है। स्मरण रहे इंडिया गठबंधन के दो घटक दलों ने इस मामले मे अलग स्टैंड लेकर कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया है। इंडिया गठबंधन के घटक नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने कांग्रेस की ईवीएम पर तीखी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नही हो सकता कि जब आप चुनाव जीत जाएं तो परिणाम को स्वीकार कर ले और जब हार जाएं तो ईवीएम पर दोष मढ़ दे। उमर ने कहा जब इसी ईवीएम के इस्तेमाल से आपके लगभग सौ सदस्य सदन मे पहुंच जाते है और आप इसे पार्टी की बड़ी जीत मानते हुए जश्न मनाते है और फिर कुछ माह बाद आप पलट कर कैसे कह सकते है कि हमे ईवीएम पसंद नही है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि या तो ईवीएम का रोना बंद करो या फिर जब तक ईवीएम है चुनाव मे भाग लेना बंद करो।

उमर के ब्यान के एक दिन बाद इंडिया ब्लॉक के दूसरे बड़े घटक तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उमर की बात का समर्थन करते हुए कहा कि ईवीएम के विषय मे कांग्रेस के आरोपो मे दम नही है। कांग्रेस अभी तक अपने आरोपो के समर्थन मे सबूत पेश नही कर सकी है। उन्होने कहा कि कांग्रेस को ईवीएम मे गड़बड़ी के सबूत पेश करने चाहिए। अभिषेक ने कहा कि मै लम्बे समय से जमीन पर चुनावी प्रक्रिया को देख रहा हूँ। इस सारी प्रक्रिया पर हमारे कार्यकर्ता नजर रखते है। उन्होने कहा कि अगर फिर भी किसी को लगता है कि ईवीएम मे छेडछाड हो सकती है वह निर्वाचन आयोग के सामने सबूत पेश करें। मेरी समझ मे कांग्रेस को ईवीएम के विरोध मे अगर निर्णायक लड़ाई लड़नी है तो उसे सबसे पहले इंडिया ब्लॉक के घटकों और गैर भाजपा दलों को विश्वास मे लेना होगा और अपने आरोपो को निर्वाचन आयोग और जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय के सामने सिद्ध करना होगा। अगर वहां सुनवाई नही होती तो लोकतंत्र मे उठाए जाने वाला आखरी हथियार जन-आन्दोलन खड़ा करना होगा। अभी तो कांग्रेस के सहयोगी दलों ने ही कांग्रेस के ईवीएम विरोध की हवा निकाल दी है और भाजपा के स्टैंड को मजबूती प्रदान कर दी है।

#आज_इतना_ही।

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