*विश्लेषण*राहुल गांधी को मानहानि केस मे दो साल की सजा* लेखक महेंद्र नाथ सोफत*



25 मार्च 2023- ( राहुल गांधी को मानहानि केस मे दो साल की सजा।)- मोदी उपनाम संबंधी टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि की अपराधिक शिकायत का फैसला सुनाते हुए सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को 2 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उसी समय राहुल गांधी को बेल भी दे दी है। अदालत ने राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओ 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया है। इस खबर से भी बडी खबर है कि राहुल की लोकसभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। स्मरण रहे राहुल ने कहा था कि सारे चोरो के सरनेम मोदी क्यो होते है। जब उन्होने मोदी सरनेम का उल्लेख किया तो उसने प्रधानमंत्री मोदी का भी नाम लिया था। उनके इस वक्तव्य से नराज होकर भाजपा विधायक एवम पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने अपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। कानून के जानकारो के अनुसार यदि राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से राहत नही मिलती तो वह सजा पूरी होने के 6 वर्ष बाद तक चुनाव नही लड़ सकेगें।उल्लेखनीय है पहले यह प्रावधान अंतिम अदालत से सजा होने बाद लागू होता था। इस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट ने अपील के दौरान प्रभावहीन रहने को समाप्त कर दिया था। फिर मनमोहन सरकार ने अध्यादेश द्वारा कोर्ट के निर्णय को प्रभावहीन बना दिया था। जिस अध्यादेश को राहुल गांधी ने फाड दिया था और वापस करवा दिया था। स्मरण रहे राहुल को अपराधिक मानहनि मे जो अधिकतम सजा का प्रावधान है वह सजा सुनाई गई है। मेरी जानकारी के अनुसार राहुल गांधी पहले लोकसभा सांसद है जिनको अपराधिक मामले मे अधिकतम सजा सुनाई गई है। खैर कांग्रेस के बड़े वकील मनु सिंघवी ने पत्रकारो से बातचीत करते हुए अदालत के फैसले मे कई तकनीकी कमीयां बताई है। मेरी समझ मे यह कमीयां अब उन्हे उच्च अदालतो के सामने पेश करनी होगी। मैने राहुल के भाषण की रिकॉर्डिंग सुनी है। मेरे विचार मे निश्चित तौर पर वह भाषण मर्यादित भाषण की श्रेणी मे नही आता है। इस मामले मे यह तर्क काम नही करेगा कि भाजपा के नेता भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते है। उनकी भाषा और भाषण यदि अमर्यादित है और अपराधिक मानहनि की परिधि मे आती है तो आपके पास भी अदालत का रास्ता उपलब्ध है। वैसे राष्ट्रीय पार्टी के नेता से अमर्यादित भाषा की अपेक्षा नही की जा सकती है। काबिले गौर है कि लगातार हमारे नेताओ और सांसदो का जिसमे सभी दलो के लोग शामिल है की भाषा का स्तर लगातार गिर रहा है। नेताओ को तथ्यो के साथ ही आरोप लगाने चाहिए और मर्यादित भाषा का प्रयोग एक – दूसरे के लिए करना चाहिए। मै स्वयं भी अपराधिक और सिविल मानहानि के मुकदमो का सामना कर चुका हूँ। हालांकि मैने जो कुछ कहा था उसके सारे प्रमाण मेरे पास मौजूद थे। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता द्वारा दायर मुक़दमे के चलते कोर्ट मे लगातार पेशियां भी किसी सजा से कम नही होती है। इसलिए पत्रकार अक्सर अपराधिक मानहानि कानून को रद्द करने की मांग करते रहते है। कांग्रेस अब इसके लिए प्रधानमंत्री और भाजपा को जिम्मेदार बता रही है। जब की यह फैसला अदालत का है। कांग्रेस इस फैसले को ऊपरी अदालत मे चुनौती देने की बात भी कर रही है। इसका अर्थ है वह न्यायिक प्रक्रिय मे विश्वास रखती है। यदि न्यायिक प्रक्रिय मे विश्वास है तो सूरत की अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विश्वास रखना होगा। आज इतना ही कल फिर नई कड़ी के साथ मिलते है।
