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*बिजली और जनता*

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बिजली और जनता
बरसात का मौसम हो या सर्दियों का या फिर तपती गर्मियों का , हमारी बिजली जाने के कुछ तकनीकी कारण है । जब कट लगे तब समझिए की पानी की कमी से बिजली उत्पादन में कमी है।वास्तविकता यह है कि हम यानी4 पूरा भारत अभी तक बिजली नामक ऊर्जा की कमी से जूझ रहा है । इसकी वजह यह भी है कि हम कोयले पर भी निर्भर है और सौर ऊर्जा में आगे तो बढ़ रहे हैं लेकिन अभी काफ़ी सफर तय करना है । इसके इलावा यह जो आंख मिचौली चलती है इसकी सब से बडी वज़ह जुगाड है जो तकनीक की और सामान कि कमी की वजह से है कुछ अत्यधिक लोड की वजह से है । किसी भी ट्रांसफॉर्मर की आउटपुट केवीए से निर्धारित होती है । हालत यह है कि हर ट्रांसफॉर्मर उसकी क्षमता से अधिक लोड है । बिजली विभाग बदलता तो रहता है लेकिन तब तक मकानों की दुकानों को फैक्ट्रियों की मांग बढ़ जाती है । हर distrbuting ट्रांसफॉर्मर को लोड से बचाने के लिए फ्यूज लगाएं जाते है ताकि लोड अधिक होने पर फ्यूज उड़ जाए और जो फ्यूज लगाए जाते हैं उनका सामान की कमी के वजह से जुगाड किया जाता है । जैसे फ्यूज वायर को घुंडी मरोड़ कर जोड़ दिया जाता है जो कि विद्युत में loose connection माना जाता है इस loose connection के कारण वो ज्वाइंट गर्म होता है नतीजा गर्म हो कर पिघल जाता है और बिजली चली जाती है या फिर अधिक लोड से फ्यूज उड़ जाता है । इसे कहते हैं देसी जुगाड या काम चलाऊ जुगाड । बिजली बोर्ड के पास इतने पैसे ही नही हैं कि वहां HRC फ्यूज का इस्तेमाल करे । द्वारा कारण है जब किसी main लाइन से आपकी पीवीसी जोड़ी जाती है तो वहां भी connector बिजली बोर्ड के पास नही होते वो भी घुंडी मरोड़ कर जुगाड किया जाता है नतीजा वारिश का पानी और loose connection यहां भी अपनी कार्यवाही करता है और बिजली चली जाती है या फिर हवा के कारण वहां स्पार्क होता है और बिजली गुल । तीसरा कारण घरों को डाली जानी वाली पीवीसी को ढंग से नही जोड़ा जाता अपितु short cut रास्ता अपना कर बिना स्टील वायर के लटकी हुई दिखाई देरी है । इसके इलावा खम्बो पर आपने तारों के बेतरतीब गुच्छे लटकते देखे होंगे यह भी बिना किसी तकनीक और स्किल के होते हैं यह भी बिजली जाने के कारण बनते हैं। तीसरा विभाग के अपने फीडर कई बार हवा से झूलते हुए आपस में टकरा जाते हैं जब उनमें proper distance रखने के लिए distencer न लगाएं होते है । यह साइड बिजली विभाग की कमी दर्शाती है ।
अब जनता भी एक सीमा तक जिम्मेदार है । कोई भी व्यक्ति जिसे कनेक्शन लेना होता है कभी भी कनेक्टेड लोड सही नही भरता । यानि अगर घर का connected load 10 kW है तो चार भरा जाता है ताकि पैसे कम लगे । आज कल किसी भी तीन चार कमरे के घर में दो बाथरूम और चिमनी ,हीटर या एक आदि से दस kw load हो जाता है । विभाग ट्रांसफार्मर रखती बार आपके द्वारा भरे गए लोड के अनुसार रखता है । नतीजा हर समय कमी और वोल्टेज ड्रॉप चलता रहता है । हम अपने घरों की अर्थिंग भी नही करते और unskilled electrician earth वायर बहुत पतली डालते है यही वजह है कि लाइटनिंग या किसी अन्य कारण से हम अपने instrument जला बैठते हैं। कभी घर का थ्री पिन प्लग देखिए उसमे अर्थ वाला टर्मिनल सबसे बडा होता है इसलिये अर्थ की तार भी उसी हिसाब से मोटी होनी चाहिए लेकिन हम कंजूसी कर जाते हैं । इसलिए आगे से सावधान रहीए अपने को भी ठीक करिए और फिर बिजली विभाग को ।

Umesh Bali Tct

धन्यवाद। उबाली ।

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