पाठकों के लेख एवं विचार

*पाठकों के लेख:एक सुंदर रचना :-लेखक: संजीव गांधी IPS*

 

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सच्चे स्नेह के रिश्ते
सीधे सादे
जैसे
पतंग से जुड़े डोर
एक तरफ पकड़कर धरा रखे
दूजा अंतहीन गगन छोर। ।

जिसके
रंग सात
सात्विक तत्व
जैसे…
निर्मल नीर
श्याम वर्ण
श्वेत वस्त्र
धारण कर
आनंदमय होकर
नटराज
व्यापक सर्वत्र
हो हिमालय या कंकर
विहार करे
चराचर मे
जैसे
गौरा-शंकर ।।।

वात्सल्य भाव ऐसा
शिशु
का भरोसा
जैसा
न संशय न कोई द्वंद्व
आशा, अकांक्षा
अपेक्षा, उपेक्षा से
रहित
जैसे हवांए
कहां माने प्रतिबंध

अव्यक्त ऐसे
एक
बादल छुपाकर रखे
बूंद-बूंद पानी
धूप छांव से
सच्चे मीत
जिनकी
विशुद्ध कहानीकार
लिखे
कोइ कहानी।।।।।

Sanjeev Gandhi IPS

Sanjeev Gandhi IPS

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