पाठकों के लेख एवं विचार

पाठकों के लेख: मनमोहन सिंह धर्मपुर

 

क्या लोग हैं?

ज्योति शहीदों की बुझाने में लगे हैं,
ये देश को क्या बनाने में लगे हैं।

बदलने की कोशिश में हैं इतिहास सारा,
खुद को सरफिरोश बताने में लगे हैं।

आह मजलूमों की इन्हें सुनती नहीं,
नमक जख्मों पे लगाने में लगे हैं।

मुखौटे बदलने में माहिर हैं ये बहुत,
गीदड़ को खाल शेर की पहनाने में लगे हैं।

पर्दे के पीछे कई स्याह काम हैं इनके,
पुलवामा को भी भुलाने में लगे हैं।

राजनीति को तिजारत बना डाला इन्होंने,
कसमें झूठी, आईन की खाने में लगे हैं।

दोस्त सरहद पार कोई नज़र आता नहीं,
बस गिनती दुश्मनों की बढ़ाने में लगे हैं।

Manmohan Singh Dharampur

– मनमोहन सिंह

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