*प्रोफेसर निवेदिता परमार गुरु शिष्य परंपरा की अद्भुत मिसाल*


*प्रोफेसर निवेदिता परमार गुरु शिष्य परंपरा की अद्भुत मिसाल*

प्रोफेसर निवेदिता परमार, जो अपने विषय की ही प्रोफेसर नही हैं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग की भी प्रोफेसर हैं तथा भावनात्मक मूल्य की कदर करने की भी प्राध्यापिका है ।
किताबों में जो लिखा केवल वही नहीं पढ़ाती हैं बल्कि उनके मन से, उनके दिलों दिमाग से, जो आवाज आती है अपने कर्तव्यों के पालन करने के लिए समाज के प्रति ,,,,उसको वह बखूबी निभाती हैं।
अपनी सैलरी का 20-30% हिस्सा समाज सेवा में लगा देते हैं शायद ही ऐसा कोई अध्यापक या गुरु होगा जो इतना कुछ करता हो….. प्रोफेसर निवेदिता ने अभी एक बेटी को गोद दिया उसकी पढ़ाई पूरी कार्रवाई ,उसे आर्थिक मानसिक और सामाजिक रूप से समर्थन दिया, उसका साथ दिया और उसका जीवन बेहतर बनाने में जुट गई । यह बिटिया पालमपुर से ही है तथा उसने ऑल इंडिया लेवल पर UGC का EXAM कम्पीट किया था जिसमें 9 लाख 30 हजार कैंडिडेट UGC का इम्तिहान देने के लिए अपीयर हुए थे ,जिसमें से 33000 यह एग्जाम क्लियर पर कर पाए और उन 9,30,000 में से यह बेटी भी है जिसे मैडम परमार ने तन मन धन दिलों दिमाग से सपोर्ट किया.🙏
ऐसा नहीं है कि परमार मैडम ने केवल इसी बेटी को पढ़ाया लिखाया या सहायता की,बल्कि अन्य विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों की सहायता करती रहती है।
यह प्रोफेसर (परमार) दिमाग से कम और दिल से ज्यादा सोचती हैं इसलिए अपनी सैलरी का 20-30% लोगों की सेवा में लगा देती है। ऐसी महान व्यक्तित्व को सलाम🙏🙏🙏गुरु अपने शिष्य के लिए सब कुछ निछावर कर देता है जिसका एक उदाहरण है “विद्वान् चाणक्य ने अपने शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य को नृपति बनाने के लिए अपनी समझ, शिक्षा और समर्पण से सशक्त किया”।
जेब से पैसे खर्च करके शिक्षा प्रदान करना, यह एक उदार और सेवाभावी कृति है। यह प्रयास न केवल शिक्षा को सुलभ और सुयोग्य विद्यार्थियों की पहुंच तक जाता है , बल्कि समाज में सामाजिक न्याय और समानता के प्रति भी संकल्पित करता है। इस प्रयास से हो रहे सतत योगदान के लिए हैरान करने वाले प्रयासों के लिए सलाम।