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*सड़क और हम* उमेश बाली

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सड़क और हम
बरसात का मौसम है , दुर्घटनाएं हो रही हैं कहीं सड़क का दोष है कहीं जनता का और सबसे अधिक प्रशासन का प्रभावी न होना । जो विद्यार्थी , public administration पढ़ते हैं उसकी पहली लाइन है ,to put law into effect . लेकिन छोटी छोटी बातों में प्रशासन को निष्क्रिय कर दिए जाता है । गति सीमाएं हैं लेकिन परवाह नही । एक मामूली हेलमेट के चलान पर राजनीति हावी हो जाती है और प्रशासन पंगु । सड़को में खड्डे बरसात से पहले भर दिए जाने चाहीए कयोंकि पानी भर जानें के बाद ड्राइवर को या पैदल चलने वाले को नही पता होता कि कितना गहरा हैं । सड़क के किनारे ऐसे होते है जो अक्सर बैठ जाते हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया जाता । कोई कार्य योजना नही बस हिट न ट्रायल चलता रहता है । अगर कस्बों की बात करें तो कब्जो ने पैदल चलने वालों को ही मोहाल कर रखा है । पपरोला में ही कम से कम मेने ठारू और पेट्रोल पंप के बीच सड़क पर पैदल चलने वाले जख्मी होते भी देखे और बेचारे मारते भी देखे । कम से कम एक साल के भीतर पांच लोग जख्मी हुए और दो जान से हाथ धो बैठे । कम से कम जहां जगह खुली है वहां तो फुटपाथ का प्रबंध हो । सुबह आठ से दस और शाम तीन से आठ बजे तो अत्यधिक यातायात का लोड होता है उस समय की बात रहने भी दीजिए सड़क को क्रॉस करना भी जोखिम पूर्ण हो चूका है उपर से बाइकर्स या गाड़ियों की कोई गति नियंत्रण नही । कब कोई ठोक दे कुछ नही पता । जहां सकूल के बच्चे क्रॉस करते है या शहरी इलाकों में कस्बों में कोई जेब्रा क्रॉसिंग नही । कही गाड़ियों के लिए कोई give way का नियम नही सब भगवान भरोसे । मंत्री निकलते है तो पुलिस लगती है ताकि मंत्री की गाड़ियों की गति पर कोई रोक न हो तो जनता का भी यही हाल है । कम से कम सड़क के किनारों पर फुटपाथ और फुटपाथ के बाद भी कुछ खाली जगह उसके बाद निर्माण होना चाहीए । रेहड़ी या फड़ी वालो के लिए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए वो सड़क और फूट पाथ का अतिक्रमण न करें । उन्हे सरकार योजना बना कर हाईवे से हट कर सरकारी जगह लीज पर दे सकती है और अतिक्रमन पर सख्ती हो सकती है । जेब्रा क्रॉसिंग पर या फुट पाथ पर कोई रौंद देता है तो गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज होना चाहिए और अगर खड्डे या सड़क का किनारा बैठने पर हादसा होता है और जान जाती है तो विभाग पर हत्या का केस दर्ज हो । सड़को की मुरम्मत 24 /7 दिन होनी चाहिए ।
दूसरी तरफ ड्राइविंग के टेस्ट कठिन होने चाहीए और गाड़ी चलाने वाले को और गाड़ी के मालिक को यह अहसास करवाया जाए की सड़क में पैदल चलने वालों का आधिकार पहले है । वो लोग जो कड़ी धूप मे या बरसात में पैदल सड़क क्रॉस कर रहे हों उनको हरगिज गाड़ी छोटी हो या बडी उनको give way देना चाहीए । इसके caution लगाए जाने चाहीए कि हर पैदल चलने वाले लोगो को सुविधा हो । ड्राइवरो को यह बात हरगिज दिमाग में होनी चाहिए कि हर जान कीमती हैं उनकी अपनी भी और साथ में बैठे हुए सह यात्रियों की भी । जीवन कोई बार बार नही मिलता कि उसे दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ा दिया जाए । गति सीमाएं निर्धारित है प्रशासन उनका पालन करवाए उससे यह भी होगा की रात्रि को हाई बीम पर चलने की अवश्यकता नही रहेगी । अगर कहीं जाम लगता है तो न तो किसी बाइक वाले को न किसी कार वाले को आगे निकलने की इजाजत हो केबल रोगी वाहन के लिए व्यवस्था होनी चहिए । बाकि किसी मंत्री के लिए भी नही । बरसात के दिनों में तेजगति से चलते वाहन अचानक ब्रेक लगाने से भी दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं इसलिए बचाव जरूरी हैं । सावधानी से चलिए , गति सीमा में चलिए और सभी को सुरक्षित राखिए ।

Umesh Bali Tct

धन्यवाद । उ बाली ।

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2 Comments

  1. बाली जी ! आपने हालात और वक्त के अनुसार बहुत ही अच्छा लेख लिखा है, दुर्घटनाएं तो अक्सर होती रहती हैं मगर बरसात में इनकी संभावना ज्यादा हो जाती है ये भी आपका कहना बिल्कुल सही है कि प्रशासन प्रभावी नहीं है और शासन भी अपना कोन सा जिम्मा निभा रहा है इससे भी हम सभी भली भांति परिचित हैं जब जब सरकारें बनती हैं तब तब विधायक जिनका मंत्री बनना तय होता है वो अपनी गोटियां दो विभागों के लिए फिट करते हैं एक पी डबल्यू डी और दूसरा ट्रांसपोर्ट और दोनो ही फेल रहते हैं चाहे कोई भी सरकार रही हो या चल रही है, जिसका अंदाजा आप निगम की बसों और सड़कों की हालत से लगा सकते हैं, नई सड़कें बनाना और नई बसें खरीदना कोई मुश्किल नहीं है मगर इनका रख रखाव मुश्किल है और जब विभाग पर ही पकड़ नहीं होगी तो मंत्री साहब भी कोन सा तीर मार लेंगे , हां बात लगी थी दुर्घटनाओं की , बाली साहब इसमें गति सीमा को पार कर जाना तो एक कारण है ही साथ ही ओवर स्पीड में अपनी साइड का ध्यान न रखना और इसमें युवा सबसे आगे हैं चाहे वो दुपहिया वाहन पर हों या चार पहिया पर और ऐसा भी नहीं है कि व्यस्क ऐसी गलती नहीं करते , लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया , गति सीमा का निर्धारण और बाकी सभी सुरक्षा साधनों का पालन सख्ती से करवाया जाना चाहिए, दुर्घटनाओं के लिए सबसे बड़ा जिमेदार विभाग भी है , सालों से सड़क में पढ़े गढ़ों को खुद विभाग के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने देखने की कोशिश ही नहीं की ओर जब पत्रकारों द्वारा लाइव दिखाया गया तब भी महीनो विभाग के कानो पर जूं नहीं रेंगी, अभी परसों ही प्रवीण शर्मा जी अरला के पुल पर पढ़े गढ़ों और रुके हुए पानी को लाइव दिखाने के साथ साथ स्थानीय लोगों की इसके बारे शिकायतें और सुझाव दिखा रहे थे और मजाल क्या विभाग टस से मस हो जाए , इनकी ड्यूटी केवल दफ्तर तक ही सीमित है वेशक पुल गिर जाए या कोई भी दोपहिया या चार पहिया बाला बड़ा छोटा वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए , कस्बों में भी रास्ते पर कब्जा करना एक रिवाज बन चुका है देखो देखी से लोग रुक नहीं सकते अगर एक इस बात को समझे तो बाकी भी समझ जायेंगे कब्जा करना बुरी बात है, एंबुलेंस की जरूरत जैसे शहरों में पड़ती वैसे ही कस्बों में भी है तो अगर रास्ता खुला होगा तो आसानी रहेगी, जहां तक भीड़ में एंबुलेंस को रास्ता देने की बात है ये येन केन हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि किसी की जिदंगी का सवाल होता है , अब बाजारों में बढ़ती वाहनों और इंनसानों की भीड़ को देखते हुए बाजार में आए ग्राहकों और बाकी लोगों के लिए बाजार के दोनो छोर पर सरकार ओवर हेड ब्रिजों का निर्माण करवाय ताकि वहां से लोग एक तरफ से दूसरी तरफ बगैर किसी जोखिम से आ जा सके, अंत में बात वहीं आ जाती है ये आम जनता की तकलीफें हैं मजा तो मंत्रियों का है एक बात तो जरूर हुई है अब झंडी और लाल बत्ती नहीं है नहीं तो इनको थोड़ा सा जो समय कहीं देखने का मिलता है वो भी न मिले
    Dr lekh Raj Maranda

  2. मैं भी आपके ध्यान में hotel highland recency से आगे income-tax जो सड़क जाती है बहां NH way पर गढे पडे हैं ध्यान में लाना चाहता हूं रोजआना वहां accident होता है 2/3 scooter, motorcycle बाले गिरते हैं. पिछ्ले साल वताया गया की एक scooter में बैठे लड़के की accident की बजह से जान चली गई थी, किसी का ध्यान main road पर साल से नहीं जा रहा है. Bharat Sood dy director education hp

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