सस्ते_मे_छूट_गये_शराब_के_नशे_में_धुत_होकर_आए_आई_ए_एस_अधिकारी

सस्ते_मे_छूट_गये_शराब_के_नशे_में_धुत_होकर_आए_आई_ए_एस_अधिकारी
Mahendra Nath sofa पूर्व मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार

11 नवम्बर 2021
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक मे सोमवार को एक आई.ए.एस अधिकारी शराब पी कर आ धमका। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट ने अधिकारी के संबंधित विभाग से जुड़ी जानकारी के लिए अचानक बुलाया था। आई ए एस अधिकारी सी पालरासु जैसे ही कैबिनेट हाल के बाहर पहुंचे तो उन्हे देखकर दुसरे अधिकारी और अन्य विभागाध्यक्ष हैरान हो गए। कैबिनेट मे जब उनसे सवाल किए गए तो वह कोई सन्तोषजनक जवाब नहीं दे सके। प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक मे छपी रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी से दूर तक शराब की दुर्गंध आ रही थी। अधिकारी की हालत देख कर मुख्य सचिव ने उन्हे बैठक से जाने के लिए कह दिया। शाम को उनके विभाग बदलने की अधिसूचना जारी कर दी गई। मेरे विचार मे इस प्रकार अधिकारी को सस्ते मे छोड दिया गया। विभाग बदलना कोई सजा नहीं है। इतनी बड़ी गुस्ताखी के बाद विभाग मे बदलाव अभयदान ही माना जाएगा। अधिकारी ड्युटी समय पर शराब पिए थे और सरकार की सबसे शक्तिशाली संस्था मंत्रिमंडल के सामने पेश हुए थे। ऐसी स्थिति मे उनका मेडिकल करवाना बहुत जरूरी था। अनुशासन हमेशा ऊपर से चलता है यदि इतना बड़ा प्रशासनिक अधिकारी ऐसा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करेगा तो साधारण सरकारी कर्मचारी से अनुशासित रहने की कैसे उम्मीद की जा सकती है।
मेरे विचार मे इतने बड़े अधिकारी का यह व्यवहार कदापि स्वीकार्य नहीं हो सकता । ऐसे अधिकारी की एक ही सजा बनती थी वह थी जबरी सेवानिवृत्ति और उसके लिए मेडिकल रिपोर्ट प्रदेश सरकार की सिफारिश के साथ जबरी रिटायरमैंट का केस केंद्र सरकार को भेजा जाना चाहिए था क्योंकि आई ए एस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग के पास होता है। इतिहास गवाह है हिमाचल मे शराब पीने और फिर एक पुलिस अधिकारी को धमकाने के आरोप मे 1990 की भाजपा सरकार के समय एक मंत्री की कुर्सी चली गई थी। यह अधिकारी तो ऐसी हरकते करने लिए आदतन है वह पहले ऐसी ही हरकत के चलते मीडिया मे सुर्खियां बटोर चुका है, फिर उसने यह गुस्ताखी सारी सरकार के सामने कर सरकार की बेअदबी की है। सरकार के पास यह मौका था कड़ी कार्रवाई कर कड़ा सन्देश देने का। हालांकि अब देर हो चुकी है फिर भी यदि कम से कम उक्त अधिकारी को जबरी लम्बी छट्टी पर भी भेज दिया जाए तो अफसरशाही को अच्छा सन्देश जा सकता है।