

25 अप्रैल 2024- (#मसालो_पर_प्रतिबंध_सरकार_ने_मांगी_रिपोर्ट)–

भारत मे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर प्रश्न खड़े होते रहते है। दवाईयों के सैंपल फेल होना और नकली दवाईयों के कारोबार के संबंध मे समाचार पढ़ने को मिलते है। आज प्रतिष्ठित दैनिक मे दो प्रतिष्ठित कंपनीज के मसालो पर सिंगापुर और हांगकांग ने आयात प्रतिबंधित कर दिए है। काबिले गौर है कि यह प्रतिबंध एम डी एच और एवरेस्ट मसाले की कंपनीज पर लगा है। दोनो मासला उधोग के बड़े नाम है और दोनो सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का दावा करते है। एम डी एच के सस्थापक स्वर्गीय धर्मपाल गुलाटी तो अपने मसालो के प्रचार प्रसार और गुणवत्ता के दावो के लेकर करोड़ों रूपए के विज्ञापन हर वर्ष जारी करते थे, लेकिन इन कंपनीज के दावों की उस समय पोल खुल गई जब दोनो देशों के नियामको ने दावा किया कि इन दोनो कंपनीज के कुछ मसालो मे कैंसर कारक कीटनाशक एथिलीन ऑक्साइड की उच्च मात्रा मिली है। इसके साथ ही दोनो देशों ने भारत से इन कंपनीज के मसाले आयात करने बंद कर दिए है।
स्मरण रहे भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। यह बात भी दर्ज करने काबिल है कि इससे पहले 2023 मे अमेरिकी प्रशासन ने भी एवरेस्ट सांभर मसाले और गरम मसाले के नमूनो पर सवाल उठाए थे। मेरी समझ मे सबसे अफसोस जनक बात है कि हमे अपने घटिया मसालों की जानकारी विदेशों से प्राप्त हो रही है। हमारे देश मे प्रभावशाली नियामक नहीं है। जिनकी खाद्य पदार्थ आदि की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी है। वह गुणवत्ता जांचने के लिए कम और हफ्ता वसूली के लिए अधिक जाने जाते है। खैर भारतीय मसालो पर अगर आज दूसरे देश सवाल उठा रहे है तो यह स्थिति समुचित जांच व नियमो का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्यवाई की मांग करती है। मेरे विचार मे अपने नागरिको के स्वास्थ्य की चिंता करना सरकार का पहला कर्तव्य है। सरकार इस मामले से कर्तव्य विमुख नहीं हो सकती।
#आज_इतना_ही।