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*कृषि विश्वविद्यालय का चने पर बेहतरीन शोध: डा.सुब्रा चक्रवर्ती एनआईपीजीआर निदेशक ने विश्वविद्यालय में परियोजना की प्रगति को जांचा*    

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कृषि विश्वविद्यालय का चने पर बेहतरीन शोध: डा.सुब्रा चक्रवर्ती
एनआईपीजीआर निदेशक ने विश्वविद्यालय में परियोजना की प्रगति को जांचा  

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पालमपुर, 15 मार्च।  चौसकु हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (एनआईपीजीआर) की निदेशक डॉ. सुभ्रा चक्रवर्ती ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय चना पर उत्कृष्ट शोध कार्य कर रहा है और इसके परिणाम प्रजनकों, जैव प्रौद्योगिकीविदों और किसानों को लाभान्वित करेंगे।
डॉ. सुभ्रा चक्रवर्ती (बायोटेक्नोलॉजी विभाग, चना मिशन प्रोजेक्ट की समन्वयक भी हैं) ने जीनोमिक्स-सहायता प्राप्त फसल सुधार में तेजी लाने के लिए चने के जननद्रव्य संसाधन की विशेषता और परियोजना के सह-समन्वयक डॉ. स्वरूप कुमार परिदा ने विश्वविद्यालय का दौरा करते हुए परियोजना की प्रगति की निगरानी की। उन्होंने कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष और परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ कमल देव शर्मा व अन्य परियोजना कर्मचारियों के साथ परियोजना गतिविधियों की योजना और निष्पादन में तेजी लाने के लिए विचार-विमर्श किया।
डॉ. चक्रवर्ती ने कुलपति प्रोफेसर एचके चौधरी से चर्चा के दौरान बताया कि भारत में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शोध कार्य किया जा रहा है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान सहित पूरे भारत में पंद्रह संस्थान इस परियोजना का हिस्सा हैं। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में सभी चने के जर्मप्लाज्म को चिह्नित करना और अन्य हितधारकों द्वारा उपयोग के लिए जानकारी का दस्तावेजीकरण करना है। विभिन्न गुणों से जुड़े जीनों को विच्छेदित करने के लिए चने के मिनी-कोर का बड़े पैमाने पर अनुक्रमण प्रगति पर है।
कुलपति ने टीम को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी और डॉ. कमल देव की सराहना की जो भारत में शीत तनाव घटक का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने टीम को उन किस्मों की पहचान करने के लिए कहा जो उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक हैं और विविधता के रूप में संभावित रिलीज के लिए उनका परीक्षण करें। उन्होंने कहा कि शोध के नतीजे गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचने चाहिए। डॉ. चौधरी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कृषि उत्पादों की पहचान और भौगोलिक टैगिंग के सफल प्रयास किए गए हैं। जिससे राज्य के किसानों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिले हैं।
अनुसंधान निदेशक डा. एस.पी. दीक्षित के साथ दो सदस्यीय टीम ने मॉलिक्यूलर साइटोजेनेटिक्स और टिश्यू कल्चर लैब का दौरा किया और क्रोमोसोम एलिमिनेशन तकनीक और सिटू हाइब्रिडाइजेशन के बारे में विस्तार से बताया।

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