नगर निगम पालमपुर की व्यवस्था बेमिसाल!
आईमा में सीवरेज ने बिगाड़े हालात, कीचड़-गड्ढों और अंधेरे में जनता बेहाल पालमपुर।


नगर निगम पालमपुर की व्यवस्था बेमिसाल!
आईमा में सीवरेज ने बिगाड़े हालात, कीचड़-गड्ढों और अंधेरे में जनता बेहाल
पालमपुर।

नगर निगम पालमपुर की कार्यप्रणाली को लेकर अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। शहर की बदहाल स्थिति देखकर स्थानीय लोग खुलकर कहने लगे हैं कि नगर निगम बनने से पहले की व्यवस्था इससे कहीं बेहतर थी। कम से कम तब न तो इतना अंधेरा था और न ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी इस कदर मुश्किल।
एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट नजर आ रही है। शहर की कई सड़कों पर गड्ढे, कीचड़ और अव्यवस्था ने आमजन का चलना-फिरना दूभर कर दिया है। कई रास्ते तो ऐसे हैं, जो सीवरेज कार्य के चलते लगभग बंद से हो गए हैं।
आईमा क्षेत्र में मंगलानी चौक से बुटेल चौक तक चल रहे सीवरेज कार्य ने हालात और भी बदतर कर दिए हैं। सड़क को खोदने के बाद लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं की गई, जिसके कारण चारों ओर कीचड़ फैला हुआ है। पैदल राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इसी मार्ग पर कम से कम चार स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है और गड्ढों व कीचड़ के कारण कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। बावजूद इसके, नगर निगम की ओर से न तो लाइटें ठीक करवाई जा रही हैं और न ही सड़क की सुध ली जा रही है।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि नगर निगम को जनता की परेशानी से कोई मतलब नहीं रह गया है। अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठकर योजनाओं और उपलब्धियों की बात कर रहे हैं, जबकि सड़कों पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
सड़कों पर गड्ढे, चारों तरफ कीचड़ और ऊपर से अंधेरा—ये हालात किसी भी जिम्मेदार शहरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। लोगों का साफ कहना है कि अगर समय रहते हालात नहीं सुधारे गए, तो किसी बड़ी दुर्घटना की पूरी आशंका बनी हुई है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर निगम पर होगी।
नगर निगम पालमपुर की यह तथाकथित ‘बेमिसाल व्यवस्था’ अब सवालों के घेरे में है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जमीनी हकीकत पर ध्यान देते हैं और कब आईमा क्षेत्र की जनता को सीवरेज के नाम पर मिली इस बदहाली से राहत मिलती है।





