#Dangerous :सिर्फ 3 दिन, 25 मौतें… और पालमपुर नगर निगम की तंग सीढ़ियां: क्या हम किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
दिल्ली और बिहार की त्रासदियों के बाद उठे सवाल, क्या पालमपुर नगर निगम भवन की संकरी सीढ़ियां आपातकाल में बन सकती हैं चुनौती?

ट्राई सिटी टाइम्स
सिर्फ 3 दिन, 25 मौतें… और पालमपुर नगर निगम की तंग सीढ़ियां: क्या हम किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

/पालमपुर।
पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई आग की घटनाओं ने एक बार फिर भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि बिहार के मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में आग लगने से 4 मरीजों ने अपनी जान गंवा दी। इन दर्दनाक घटनाओं के बाद स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपने-अपने क्षेत्रों की सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की ओर भी गया है।
इसी संदर्भ में पालमपुर नगर निगम भवन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। नगर निगम भवन में आने-जाने वाले कई लोगों का कहना है कि भवन की सीढ़ियां अपेक्षाकृत काफी संकरी प्रतीत होती हैं। कुछ लोगों का अनुमान है कि इनकी चौड़ाई शायद 3 फुट से भी कम हो सकती है, जबकि सार्वजनिक भवनों में आपातकालीन निकासी के दृष्टिकोण से अधिक चौड़ाई अपेक्षित मानी जाती है। वास्तविक माप और तकनीकी मानकों की पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है।
भवन में आने वाले लोगों का कहना है कि इन सीढ़ियों पर दो व्यक्तियों का एक साथ आराम से ऊपर-नीचे निकलना भी कठिन महसूस होता है। कई बार आम दिनों में ही लोगों को एक-दूसरे को रास्ता देने के लिए रुकना पड़ता है। यही कारण है कि कुछ नागरिक यह प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि भविष्य में कभी आग, भूकंप या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़े तो बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षित निकासी कितनी सहज होगी।
यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह कोई तकनीकी निष्कर्ष नहीं बल्कि जनसामान्य द्वारा उठाई जा रही चिंताएं हैं। भवन पूरी तरह सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसका निर्धारण केवल अधिकृत तकनीकी एजेंसियां और विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। लेकिन दिल्ली और बिहार जैसी घटनाओं के बाद ऐसे सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
विडंबना यह है कि नगर निगम स्वयं भवन निर्माण नियमों, नक्शों और विभिन्न मानकों की निगरानी करने वाली संस्था है। ऐसे में नागरिकों की अपेक्षा स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है कि नगर निगम का अपना भवन सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था के मामले में एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करे।
आज जरूरत किसी पर आरोप लगाने की नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की है। यदि भवन की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है तो एक स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट से यह बात सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि कहीं किसी सुधार की आवश्यकता है तो उसे समय रहते पूरा किया जा सकता है।
दिल्ली और बिहार के हादसों ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि दुर्घटनाएं कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आतीं। इसलिए सवाल यह नहीं कि आज कोई खतरा है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए तैयार हैं?
पालमपुर नगर निगम भवन की सीढ़ियों को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या संबंधित अधिकारी इस विषय पर कोई स्पष्टीकरण देंगे और क्या भवन की सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाएगा।
क्योंकि हर बड़ी दुर्घटना के बाद जांच तो होती है, लेकिन सबसे बड़ी सफलता उस दुर्घटना को होने से पहले रोकने में होती है।
— ट्राई सिटी टाइम्स
मुख्य संपादक: बी. के. सूद






