आज एक बहुत ही दुखद समाचार सुना कि पपरोला के ललित सूद ,नन्हा मात्र 46 साल की उम्र में इस संसार को अलविदा कह गए ।यह समाचार किसी वज्रपात से कम नहीं था अभी पिछले ही हफ्ते उनसे एक समारोह में मुलाकात हुई थी।बहुत ही जिंदादिल हंस मुख दूसरों की इज्जत करने वाले सभी के सहायता करने वाले अपने माता पिता के श्रवण कुमार अपने पूरे परिवार के लिए भगवान राम से कम नहीं थे ।इतना अच्छा लड़का इतने अच्छे संस्कारों वाला धार्मिक विचारों वाला कैसे संसार से इतनी जल्दी अलविदा ले सकता है? ईश्वर इस जैसे नेक इंसानों को इस धरती पर अधिक देर क्यों नहीं टिकने देता यह एक बड़ा प्रश्न है।
क्या वे लोग इस संसार के लायक नहीं होते या इस तरह के लोगों की स्वर्ग में ज्यादा जरूरत होती है ।भगवान अपनी नगरी में उन्हें अपने पास अपने सानिध्य में रखना चाहते हैं यह एक बड़ा प्रश्न है ।
अक्सर देखा गया है कि जो जितना अधिक अच्छा इंसान हो जिसको सब चाहते हैं जिसकी जरूरत सबको हो भगवान उसे अपनी जरूरत पूरा करने के लिए अपने पास बुला लेते हैं ।
ललित उर्फ नन्ना बहुत ही आज्ञाकारी बेटा था अपने माता-पिता का श्रवण कुमार की तरह सेवादार अपने माता-पिता के हर दुख दर्द को समझने वाला उनकी हर सुख सुविधा का ध्यान रखने वाला उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने देने वाला बेटा जिसने अपने माता-पिता की सेवा के लिए सरकारी या प्राइवेट नौकरी ना करके उनके सानिध्य में रहकर उनकी सेवा करना उचित समझा। ऐसा भाई जो अपनी बहनों को हमेशा एक स्तंभ की तरह खड़ा रहता था ।अपनी पत्नी और बच्चों के लिए एक वटवृक्ष की तरह खड़ा था इस वट वृक्ष की छांव में वह सभी निर्भीक व सुरक्षा पूर्ण भाव में खुद का जीवन व्यतीत कर रहे थे ।
एक आंधी आई और वह वटवृक्ष धराशाई हो गया किसी को विश्वास ही नहीं हुआ किसी को समझ ही नहीं आया यह क्या हो गया? कैसे इतना अच्छा इंसान जो हमेशा मुस्कुराता रहता था हंसता रहता था कभी कोई शिकन उसके चेहरे पर नहीं देखी गई ।बहुत दिलेर था आवाज में दम था दिलो-दिमाग में हौसला और हिम्मत थी ,और उसे हौसले और हिम्मत की वजह से उसका परिवार उसका संसार बहुत खुशहाल और सुरक्षा की भावना से जीवन यापन कर रहा था। उसके होने से उसके परिवार को एक बहुत बड़ी सुरक्षा की भावना रहती थी ।एकदम चुस्त-दुरुस्त और किसी के आगे हार ना मानने वाला इंसान। अपनी हिम्मत और हौसले से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने वाला इंसान धार्मिक और पारिवारिक समारोहों में सबसे आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाला अचानक से यूं अलविदा कह गया शायद उसके दुश्मन भी आज अपने आंसू नहीं रोक पाए होंगे सोच रहे होंगे कि सचमुच यह इंसान नहीं देवता था।
कहते है शिष्टाचार की सीख घर से ही शुरू होती है क्योंकि माता-पिता बच्चे के पहले शिक्षक होते हैं, माता-पिता भी बच्चे को सबसे पहले संस्कार सिखाते हैं। नन्हे के माता-पिता ने शिष्टाचार की शिक्षा देने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी और नन्हे ने भी शिष्टाचार संस्कार व्यवहार इन सब को ग्रहण करने में और उसे व्यवहारिक रूप देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
अच्छे व्यवहार हमें बताते हैं कि हमें दूसरों के साथ सम्मानजनक और विनम्र तरीके से कैसे व्यवहार करना चाहिए। इसमें हमारी सोच, व्यवहार, हावभाव और दूसरों से बात करने का तरीका शामिल है। और नन्हे में यह सभी गुण मौजूद थे सचमुच एक हीरा था वह।
हालांकि कभी कभार उससे मिलना होता था किसी समारोह में या किसी त्योहार पर परंतु जितनी इज्जत मान सम्मान वह सभी को देता था उस की कोई मिसाल नहीं कोई तुलना नहीं की जा सकती ।
सबसे दुखद पहलू यह है कि उसके बुजुर्ग माता-पिता सचमुच आज मुसीबतों के पहाड़ के तले दब चुके हैं उसकी पत्नी उसके बच्चे असहाय महसूस कर रहे हैं जितना अच्छा नन्ना था उसकी पत्नी भी उतनी ही हंसमुख दिलेर और स्फूर्ति संस्कारों से भरपूर है। सभी की इज्जत करने वाली सभी को मान सम्मान देने वाली सभी की मेहमान नवाजी करने वाली ।इस अवस्था में इतने मुसीबतों का पहाड़ वह कैसे सहन करेगी ईश्वर ही जाने। बुजुर्ग मां बाप कैसे यह दुख सहेंगे ईश्वर जाने ।और बच्चों की तो कहें क्या बेचारे कुछ भी समझ नहीं पा रहे होंगे ।
सबसे बुरा हाल तो बुजुर्ग माता-पिता का हो रहा है ।
भाव विभोर हो रहा हूं पिछले हफ्ते का उसका उत्साह उसके नाचने का अंदाज ,उसका स्वभाव याद करके आंखें छलक रही हैं। उसके माता-पिता की तस्वीर आंखों के आगे घूम रही है । सोच रहा हूं ना जाने वह इस दुख भरे पहाड़ के गिरने से कितने असहाय और कितने दुखी होंगे और कैसे वह सहन कर रहे होंगे। उनकी हिम्मत को सलाम अंत में यही दुआ है ईश्वर उसे अपने श्री चरणों में स्थान दे परिवार को शक्ति प्रदान करें।