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संपादकीय: 158 वर्ष पुराने गर्ल्स स्कूल को बंद /मर्ज करने की आखिर जरूरत क्या है?

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संपादकीय: 158 वर्ष पुराने गर्ल्स स्कूल को बंद /मर्ज करने की आखिर जरूरत क्या है?


पालमपुर का ऐतिहासिक गर्ल्स स्कूल केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि शहर की पहचान, विरासत और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। लगभग 158 वर्षों से यह विद्यालय हजारों बेटियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस स्कूल से निकली छात्राओं ने विभिन्न क्षेत्रों में पालमपुर और हिमाचल का नाम रोशन किया है। ऐसे में यदि इस ऐतिहासिक संस्थान को बंद करने या उसके स्वरूप में बड़ा बदलाव करने की बात होती है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब स्कूल वर्षों से अपनी पहचान और गरिमा के साथ कार्य कर रहा है, तब इसे बंद करने की आवश्यकता आखिर क्यों महसूस की जा रही है? विकास के नाम पर विरासत को समाप्त करना कोई दूरदर्शी सोच नहीं हो सकती। विकास और विरासत संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि वे पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार का बहुत सम्मान करते हैं। हाल ही में शांता कुमार ने भी इस स्कूल को यथावत बनाए रखने की अपील की है। उनकी अपील किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पालमपुर की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के उद्देश्य से है।
विशेष बात यह है कि पालमपुर की राजनीति में अनेक मुद्दों पर मतभेद देखने को मिलते हैं, लेकिन गर्ल्स स्कूल के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के नेता एकमत दिखाई दे रहे हैं। भाजपा हो, कांग्रेस हो या अन्य सामाजिक संगठन—लगभग सभी की मांग यही है कि इस ऐतिहासिक विद्यालय को बंद न किया जाए। जब जनप्रतिनिधि, अभिभावक, पूर्व छात्राएं, सामाजिक संगठन और आम नागरिक एक स्वर में अपनी बात रख रहे हैं, तब सरकार को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
शांता कुमार केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि हिमाचल की राजनीति के ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिनकी बात आज भी सम्मान के साथ सुनी जाती है। पक्ष और विपक्ष दोनों उनके अनुभव और मार्गदर्शन का आदर करते हैं। यदि उनकी अपील पर भी कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लोगों की भावनाओं को महत्व क्यों नहीं दिया जा रहा।
सरकार को यह समझना होगा कि कुछ संस्थान केवल भवन नहीं होते, वे इतिहास होते हैं। वे पीढ़ियों की यादों, संघर्षों और उपलब्धियों को अपने भीतर समेटे होते हैं। 158 वर्ष पुराना गर्ल्स स्कूल भी ऐसी ही एक धरोहर है। इसे समाप्त करना आसान है, लेकिन इसकी विरासत को दोबारा खड़ा करना असंभव होगा।
आज आवश्यकता टकराव की नहीं, संवाद की है। यदि सरकार के पास कोई नई योजना है तो उसे जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए। लेकिन जब पूरे क्षेत्र की भावना इस स्कूल को बचाने के पक्ष में दिखाई दे रही है, तब लोकतांत्रिक व्यवस्था का तकाजा यही है कि जनता की आवाज सुनी जाए।
पालमपुर की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत से है। यदि हम अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को ही नहीं बचा पाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। इसलिए समय की मांग है कि सरकार पुनर्विचार करे और 158 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक गर्ल्स स्कूल को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखने का निर्णय ले।
धरोहरों को बचाना केवल अतीत की रक्षा नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प भी है।
— ट्राई सिटी टाइम्स

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