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*पालमपुर में टैक्सियों का संकट: बढ़ती डिमांड के बीच सिमटती पार्किंग, चालक मालिक हुए बेसहारा*

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पालमपुर में टैक्सियों का संकट: बढ़ती डिमांड के बीच सिमटती पार्किंग, चालक मालिक हुए बेसहारा

Tct ,bksood, chief editor

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पर्यटन स्थल पालमपुर की रौनक तो दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, आबादी का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का दायरा भी लगातार फैल रहा है, लेकिन इस बढ़ोतरी के बीच शहर की सड़कों पर दौड़ने वाली टैक्सियों के लिए खड़े होने की जगह सिमटकर रह गई है। यहां थ्री-व्हीलर तो चल ही रहे हैं, फिर भी टैक्सियों की डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। एक वक्त था जब थ्री-व्हीलर के आने से पहले टैक्सी ही यहां निजी परिवहन का इकलौता साधन हुआ करती थी और आज जब मांग के मुताबिक टैक्सियों की संख्या भी बढ़ चुकी है, तो उनकी पार्किंग की जगह का संकट गहरा गया है।

मामला सिर्फ पार्किंग की कमी का नहीं, बल्कि उस जमीन के खत्म हो जाने का है जहां सालों से टैक्सियां खड़ी हुआ करती थीं। पुराना टैक्सी स्टैंड, जहां पहले टैक्सियां खड़ी होती थीं, वहां अब टूरिज्म इंफॉरमेशन सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। इसके चलते टैक्सी मालिकों और ड्राइवरों के पास अपने वाहन खड़े करने के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं बचा है। ये ड्राइवर मजबूर हैं कि कहीं भी किनारे पर गाड़ी लगा दें और उसी डर के साये में रहें कि कहां अपनी टैक्सी खड़ी करें, कब कोई सवारी मिले और कैसे जनता की सेवा करें। डर यह भी है कि कब पुलिस चालान काटकर या गाड़ी उठाकर उनकी दिनभर की कमाई पर पानी फेर दे।

सवाल यह है कि जहां शिमला जैसे बड़े, पहाड़ी और बेहद व्यस्त (कंजेस्टेड) इलाके में टैक्सियों के लिए बेहतर टैक्सी स्टैंड की व्यवस्था है, वहीं पालमपुर जैसे बढ़ते शहर में आखिर ऐसी कोई व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती जहां ये टैक्सी ऑपरेटर बिना किसी डर के खड़े होकर जनता की सेवा कर सकें? न तो प्रशासन की ओर से कोई जवाब है और न ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है।

टैक्सी यूनियन और ड्राइवरों का कहना है कि यह सिर्फ गाड़ी खड़ी करने का सवाल नहीं है, बल्कि यह उनके रोजी-रोटी से जुड़ा मुद्दा है। अगर गाड़ी को खड़ा करने की जगह ही नहीं होगी तो सवारी कहां से मिलेगी? और सवारी नहीं मिलेगी तो घर का खर्चा कैसे चलेगा? टैक्सी ऑपरेटरों की यही दुहाई है कि क्या पालमपुर का शासन-प्रशासन इस विषय पर कोई ध्यान देगा और उनकी समस्या पर मंथन करेगा, ताकि वे बेदर्दी की सड़कों पर डर-डरकर गाड़ी चलाने के बजाय सम्मान से अपनी जीविका चला सकें और जनता की सेवा कर सकें। टैक्सी ऑपरेटर और चालकों का कहना है कि शासन प्रशासन कोई भी उनकी समस्या को सुनने को तैयार नहीं और उनकी रोजी-रोटी पर जो संकट आन पड़ा है उसका समाधान निकलने में कोई भी गंभीर सोच नहीं रख रहा
ऐसे में पालमपुर का प्रशासन अगर इस बढ़ती समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं देता है, तो यह संकट और गहरा सकता है। टैक्सी ऑपरेटरों को भरोसा है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और एक ऐसा हल निकलेगा जिससे उन्हें राहत मिल सके।

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