*” काय दी चुकी गई भुख कने मही दी हटी गई लुक “*
डाक्टर लेख राज " रोडी " खलेट स्वतंत्र लेखक



डाक्टर लेख राज ” रोडी ” खलेट स्वतंत्र लेखक
हमारी पहाड़ी में एक कहावत है कि ” काय दी चुकी गई भुख कने मही दी हटी गई लुक ”
जी !

कुछ ऐसा ही है जो चुने गए थे उनकी अपनी कई काम अपने लिए और अपनो के लिए और जिनके हुए उनकी तसल्ली , मैं ये बात कर रहा हूं निगम चुनावों की जिसकी आज चुनाव आयोग द्वारा विधिवत घोषणा कर दी गई और समझ लो कि अब नये नये चेहरे और कुछ पुराने भी अपनी अपनी तारीफों के पुल बांधने आपके समक्ष ऐसे पेश होंगे जैसे पांच साल इन्होंने केवल और केवल आपका ही काम किया हो और आगे के लिए आपका आशीर्वाद लेने के बाद अगर इनको कुर्सी मिलती है तो ये फिर आपकी सेवा यानि कि जनता की सेवा में जुट जाएंगे और खास बात ये कि चाहे कभी काम पंचायत द्वारा ही हुए हों या निगम से पहले नगर पालिका द्वारा , जब ये अपनी तारीफ के पुल खुद ही बांधे गे तो लगेगा इनसे पहले विकास नाम कहीं था ही नहीं , साथ में आपके चिरपरिचित भी उनकी तारीफों के टोकरे अपने सिर पर सजा कर आपके दरवाजे पर रखेंगे कि आप को पता है पहले वाला प्रत्याशी भी हमारी ही सहमति का था , और अब आप खुद ही बोलो कि विकास की कोई कमी इनकी तरफ से रही या हमने रखी, हम भी अपनी मुंडी उनकी हां में हां मिलाने के लिए हिला देंगे , अब ये तमाशा चुनाव के दिन तक ही चलता रहेगा ऐसे ही जैसे लोहड़ी मांगने अजनबी से अजनबी बच्चे भी आपके घर आते हैं बस फर्क इतना ही है कि लोहड़ी वाले हर साल आते हैं और नेता चाहे किसी भी पार्टी का हो , भले ही किसी भी पद के लिए हो चाहे वार्ड पंच , प्रधान , जिला परिषद, बी डी सी , पार्षद या विधायक और चाहे सांसद ही क्यों न हो , फिर पांच साल के बाद ही मिलना जुलना होगा , गलती से कभी मिलने जाओ भी तो जी आप कौन और किस लिए,
मेरा इन लोगों से बहुत वास्ता पड़ा है and many of them are with this thinking for voters just like disposable syringe ” use and throw ” लेकिन एक बात इनको जरूर समझनी चाहिए कि ” हमारे बाल धूप से नहीं बल्कि उम्र के तजुर्बे से सफेद हुए हैं ” हमारे से यानि कि मेरे से आधी उम्र के हमें टरका जाते हैं लेकिन वो ये नहीं समझ पाते कि वो खुद ही ठगे जा रहे हैं क्योंकि हमारी ” age” भी आप लोगों से ज्यादा है और ” image” भी
जी जी , अब मैं बात करूंगा कि निगम के चुनाव दूसरी बार होने जा रहे हैं लेकिन इसमें ” पार्षदों ” ने क्या पाया और हमने यानि कि वोटर ने क्या खोया ? चलो जो मैं आगे लिख रहा हूं इसको पार्षदों से मत जोड़ना , जाहिर सी बात है आजादी के बाद से ही हमारी राजनीतिक व्यवस्था ऐसी रही है कि एक कच्चे मकान और साइकिल बाला नेता बड़े बड़े बंगलों का मालिक ही नहीं फॉरच्यूनर गाड़ी का और चार्टेड प्लेन का मालिक हो गया और हर पांच साल बाद इसी नेता का झंडा उठाने वाला वोटर इसका गुलाम हो गया , चाहे वो या बाद में उसका बेटा या बेटी पढ़ लिख भी गया तब भी अगर वो किसी भी कॉम्पिटीशन में चाहे टॉप करे या एंटरेंस मार्क्स लेकर परीक्षा पास कर जाए , व्यक्तिगत टेस्ट में वो तभी पास होगा यानि कि ओरल में , ये केवल किसी की शिफारिश पर ही बात रहेगी , करने बालों ने B.ed किया है वहां TET बाली शर्त किसी को मार रही है मतलब निरुत्साहित कर रही है
अभी मैं कल ही मुख्यमंत्री जी की एक स्टेटमेंट देख रहा था जिसमें उन्होंने प्रधान पद के लिए स्नातक होने की शर्त की बात की ” कि स्नातक होना चाहिए या नहीं , अब इन्हीं मुख्यमंत्री जी को अपने किसी विधानसभा सत्र में इसको प्रधानों के साथ साथ विधायकों के लिए भी ये योग्यता एक कानून बना देना चाहिए , अब एक सवाल और है ये शर्त पार्षदों के लिए क्यों नहीं ?
अब बात कह लो या इसे सवाल कहो कि पांच साल में जो पार्षद रहे , उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया जिसे हम याद करें , इनमें से कुछ फिर से अपनी किस्मत आजमाने चुनाव मैदान में उतरेंगे और रोस्टर बदल जाने से कोई किसी के साथ चलेगा या घर बाली पार्षद रही हो वो अपने पति देव को मैदान में उतारने की शिफारिश करेगी ऐसी सोच दोनों ओर से हो सकती है
सवाल वहीं रह गया कि पांच साल में इन्होने क्या किया तो मैं तो कहूंगा कुछ नहीं , वो दिया जिसकी न जरूरत न मांग और जो मांगा उस तरफ ध्यान ही नहीं दिया , केवल सोलर लाइटें लटकाई , वो भी उस हिसाब से की ” अन्ना बंडे रेवड़ियां मुड़ मुड़ अपनया नू देवे ” किसी ने दो हाथ जोड़ कर प्रार्थना भी की उसको भी अनसुना कर दिया गया , कहीं एक पत्थर तक नहीं लगवाया गया केवल पक्ष पात और चाटुकारों के इशारे पर
हां ! इस बार पालमपुर नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए राह इतनी ही आसान नहीं होगी जितनी पिछ्ले पांच साल यानि कि 21 की रही क्योंकि इस बार भाजपा बालों के लिए सबसे बड़ा एक नारा रहेगा कि कांग्रेस की सरकार होते हुए कामों को रफ्तार नहीं मिली और अब अगले साल यानि कि 27 में हमारी सरकार आ रही है तो आप लोग निगम का जिम्मा भी हमें सौंप कर देखिए फिर हम आपके किसी भी काम के लिए कोई कमी नहीं रखेंगे , देखते हैं आगे आगे होता है क्या ?



