#NHAI:*जोगिंदर नगर–पद्दर सड़क: जब एक समर्पित अभियंता विकास का पर्याय बन जाए*
इंजीनियर विकास सुरजेवाला: कर्मनिष्ठा, पारदर्शिता और जनकल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता


जोगिंदर नगर–पद्दर सड़क: जब एक समर्पित अभियंता विकास का पर्याय बन जाए
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और सामाजिक जीवन की जीवनरेखा होती है। जोगिंदर नगर से पद्दर तक का सड़क मार्ग भी वर्षों तक अपनी संकीर्णता, तीखे मोड़ों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लोगों के लिए चुनौती बना रहा। लंबे समय तक यह परियोजना विभिन्न कारणों से अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी, लेकिन आज यही मार्ग एक सफल विकास मॉडल के रूप में सामने आया है। हाल ही में हुए स्थानीय निरीक्षणों तथा ट्राईसिटी टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि इस सड़क ने न केवल यात्रा का समय कम किया है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर बनाया है।

इस परिवर्तन के पीछे यदि किसी एक नाम की सबसे अधिक चर्चा होती है तो वह है राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर इंजीनियर विकास सुरजेवाला। लगभग 35–36 किलोमीटर लंबे इस पर्वतीय मार्ग में करीब 16 किलोमीटर का हिस्सा अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। वर्षों से लंबित इस कार्य को पूरा करना आसान नहीं था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, सीमित संसाधन, मौसम की बाधाएँ और तकनीकी चुनौतियाँ किसी भी परियोजना की गति रोक सकती थीं, लेकिन इंजीनियर विकास सुरजेवाला ने अपने अनुभव, तकनीकी दक्षता, दूरदर्शिता और अद्भुत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमता के बल पर इस कार्य को नई दिशा दी। सड़क का चौड़ीकरण, खतरनाक मोड़ों का सुधार, सुरक्षा उपायों का समुचित क्रियान्वयन और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न करना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही।
किसी भी अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके कार्यालय में बैठने से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता से होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इंजीनियर विकास सुरजेवाला ने हमेशा लोगों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके लिए हर शिकायत केवल एक आवेदन नहीं, बल्कि जनविश्वास से जुड़ी जिम्मेदारी थी। सोशल मीडिया, दूरभाष या अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेना, संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश देना और स्वयं फॉलो-अप कर समाधान सुनिश्चित करना उनकी कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। यही कारण है कि लोग उन्हें केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासक के रूप में देखते हैं।

उनकी एक और उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि उन्होंने कार्य करते समय किसी भी प्रकार के अनावश्यक दबाव को अपने निर्णयों पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने सदैव नियमों, तकनीकी मानकों और जनहित को सर्वोपरि रखा। यदि कहीं गुणवत्ता से समझौते की संभावना दिखाई दी तो उन्होंने बिना किसी हिचक के आवश्यक निर्णय लिए। यही प्रशासनिक निष्पक्षता किसी भी बड़े अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होती है। विकास कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों का संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन इस परियोजना में यह संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी सहज उपलब्धता और कार्य के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता भी रही। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा अक्सर सुनने को मिलती है कि छुट्टियों के दौरान भी यदि कहीं कोई गंभीर समस्या सामने आती थी तो वे उसे अगले कार्यदिवस तक टालने के बजाय तत्काल समाधान का प्रयास करते थे। यही समर्पण किसी सरकारी अधिकारी को सामान्य प्रशासनिक अधिकारी से अलग पहचान दिलाता है।
इंजीनियर विकास सुरजेवाला केवल एक कुशल तकनीकी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि एक ऐसे नेतृत्वकर्ता भी हैं जो अपनी पूरी टीम को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। अपने सहकर्मियों तथा मातहत कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार सदैव सौहार्दपूर्ण, सम्मानजनक और सहयोगात्मक बताया जाता है। वे अनुशासन और कार्यकुशलता के साथ-साथ टीम भावना को भी समान महत्व देते हैं। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में कार्य करने वाले अधिकारी और कर्मचारी भी स्वयं को जिम्मेदारी के साथ परियोजनाओं से जोड़ते हैं। किसी भी बड़े विकास कार्य की सफलता केवल एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम होती है, और उस टीम को प्रेरित रखने की क्षमता एक अच्छे नेतृत्वकर्ता की सबसे बड़ी विशेषता होती है।
जोगिंदर नगर–पद्दर सड़क परियोजना इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासनिक ईमानदारी, तकनीकी दक्षता, जनसेवा का भाव और दृढ़ इच्छाशक्ति एक साथ हों तो वर्षों से लंबित परियोजनाएँ भी समय पर पूरी हो सकती हैं और उनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुँच सकता है। आज इस सड़क ने यात्रा को आसान बनाया है, दुर्घटनाओं की आशंका कम की है, किसानों, व्यापारियों और पर्यटन क्षेत्र को नई गति दी है तथा दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
इंजीनियर विकास सुरजेवाला का नाम भी अपने अर्थ की तरह विकास की भावना को साकार करता हुआ प्रतीत होता है। उनके कार्यों में ईमानदारी है, निर्णयों में पारदर्शिता है, व्यवहार में विनम्रता है, नेतृत्व में आत्मविश्वास है और जनसेवा के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है। ऐसे अधिकारी केवल परियोजनाएँ पूरी नहीं करते, बल्कि लोगों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत करते हैं। यदि शासन व्यवस्था में अधिक से अधिक अधिकारी इसी सोच, संवेदनशीलता और निष्ठा के साथ कार्य करें तो विकास केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं रहेगा, बल्कि हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन जाएगा। ऐसे कर्मनिष्ठ, जनोन्मुखी और प्रेरणादायी अधिकारियों को समाज सदैव सम्मान और आदर की दृष्टि से देखता है।




