*दूसरी पारी* 🌸 a beautiful poem by Meenakshi Sood Noida


दूसरी पारी 🌸
अब जीवन दो भागों में बँट गया,
पहली पारी का सुंदर समापन हुआ।
शत-प्रतिशत अपना हर कर्तव्य निभाया,
अब हमने अपनी दूसरी पारी का आग़ाज़ किया।
पहली पारी में वक़्त से दौड़ लगाई थी,
हर ज़िम्मेदारी हँसकर निभाई थी।
ख़ुद को पीछे रखकर अपनों को आगे किया,
यही मेरे जीवन की सबसे सच्ची कमाई थी।
कभी सपनों में रंग भरे,
तो कभी सपने ही बिखर गए।
कभी राह में तपती धूप मिली,
तो कभी मेघा बरस गए।
कुछ अपने साथ-साथ चलते रहे,
कुछ बीच राह में ही बिछड़ गए।
कुछ नए साथी जीवन में आए,
तो रिश्तों के रंग और भी निखर गए।
सुबह की भाग-दौड़,
ज़िम्मेदारियों का अंतहीन सिलसिला…
घर, परिवार, काम और कर्तव्य—
बस चलता ही रहा यह क़ाफ़िला
जीवन ने एक नया अध्याय खोल दिया।
अब आई है दूसरी पारी…
थोड़ी ठहरी,
थोड़ी मुस्कुराती,
और सुकून से भरी हुई।
अब न कोई होड़ है,
न कोई दौड़ है।
न राग है,
न द्वेष है।
बस मन में एक मधुर ठहराव है।
ख़ुद से मिलने का वक़्त अब आया है,
अपने दिल की सुनने को मन ललचाया है।
जो सपने अधूरे रह गए थे,
उन्हें फिर से जीने का हौसला जगाया है।
अब हर दिन ख़ुद में ख़ुद की तलाश होगी।
किताबें भी होंगी,
साथी भी होंगे।
बैठक में ग़ज़लें भी होंगी,
गीत भी होंगे।
अब ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं होगा,
हर साँस की लय में
उसका बस शुक्रिया ही होगा।
यह रुकने का नहीं,
स्वयं को फिर से गढ़ने का समय है।
नई उड़ान भरने का,
नई पहचान बनाने का समय है।
आओ…
जो बीत गया उसे प्रणाम करें,
जो आने वाला है उसका सम्मान करें।
धन्यवाद 🙏



