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टांडा (राजपुर) में बाबा साधु राम मसंद के भंडारे में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम

*उमड़ते हुए भक्तों के जन सैलाब को देख कर ऐसा लग रहा था कि ये कोई ( जग ) भंडारा है या किसी केंद्रीय काबीना मंत्री की चुनावी रैली *

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उमड़ते हुए भक्तों के जन सैलाब को देख कर ऐसा लग रहा था कि ये कोई ( जग )
भंडारा है या किसी केंद्रीय काबीना मंत्री की चुनावी रैली *

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ट्राई सिटी टाइम्स | पालमपुर समाचार

टांडा (राजपुर) में बाबा साधु राम मसंद के भंडारे में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम

नवरात्रि की नवमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़; बाबा श्रद्धा सिद्ध भक्ति मंदिर एवं आश्रम में वर्षों से निभाई जा रही सेवा, परोपकार और जनकल्याण की परंपरा

पालमपुर। टांडा (राजपुर) स्थित बाबा श्रद्धा सिद्ध भक्ति मंदिर एवं आश्रम में शारदीय नवरात्रि की नवमी के पावन अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि दृश्य किसी बड़े धार्मिक मेले जैसा प्रतीत हो रहा था। भक्तों की भारी भीड़, चेहरे पर श्रद्धा का भाव और बाबा के दर्शन व आशीर्वाद के लिए लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जनसैलाब को देखकर सहज ही मन में सवाल उठता था कि यह कोई विशाल जागरण-भंडारा है या किसी बड़े जनसमागम का दृश्य!

इस विशाल भंडारे का आयोजन आश्रम के संचालक पूजनीय बाबा साधु राम मसंद जी के मार्गदर्शन में किया गया। वर्षों से यहां शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान साल में दो बार भंडारे का आयोजन होता आ रहा है। इन आयोजनों में हर वर्ष श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था और जुड़ाव को दर्शाती है।

बाबा बालकनाथ जी के प्रति अटूट श्रद्धा

बाबा साधु राम मसंद जी का जीवन श्रद्धा, सादगी और सेवा-भाव से जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा बालकनाथ जी के प्रति उनकी अटूट भक्ति को विशेष महत्व देते हैं। आश्रम में बाबा बालकनाथ जी की मूर्ति स्थापित है, जिसके समक्ष श्रद्धालु माथा टेकते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना करते हैं।

बाबा साधु राम जी के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। अनेक लोग वर्षों से उनसे जुड़े हुए हैं और अपने अनुभवों के आधार पर उन्हें अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, बाबा जी विभूति और डोरी प्रदान करते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से लोगों को संबल देते हैं। कई अनुयायी दावा करते हैं कि उन्हें इससे अपनी परेशानियों से जूझने की शक्ति और जीवन में नई उम्मीद मिली है।

हर वीरवार और रविवार को पहुंचते हैं श्रद्धालु

आश्रम में प्रत्येक वीरवार और रविवार को श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक लोग यहां पहुंचते हैं। इनमें शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के साथ-साथ मानसिक तनाव और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं से परेशान श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।

अनुयायी बताते हैं कि बाबा जी के समक्ष अपनी समस्याएं रखने और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने से उन्हें मानसिक शांति मिलती है। कुछ श्रद्धालु अपने अनुभवों को चमत्कार के रूप में भी देखते हैं।

गरीबों, बेटियों और जरूरतमंद बच्चों के लिए भी सेवा

बाबा साधु राम मसंद जी की पहचान केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं बताई जाती। उनके अनुयायियों के अनुसार, आश्रम में गरीब और जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में सहयोग किया जाता है तथा असहाय बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने जैसे सेवा कार्य भी किए जाते हैं।

समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता की यह भावना आश्रम की गतिविधियों का महत्वपूर्ण पक्ष है। धार्मिक आस्था के साथ जब सेवा और परोपकार जुड़ते हैं, तो ऐसे प्रयास समाज में सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।

उच्च शिक्षा और प्रतिष्ठित पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद असाधारण सादगी

बाबा साधु राम मसंद जी कृषि विश्वविद्यालय में एक अच्छे पद पर सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके बड़े बेटे और बहू एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जबकि छोटे बेटे ने कृषि में एमएससी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके बावजूद, उनके अनुयायी उनके व्यवहार, विनम्रता और सहज बोलचाल को विशेष रूप से याद करते हैं।

उनसे मिलने आने वालों में सामान्य परिवारों से लेकर उच्च शिक्षित लोग, अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, व्यापारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल  हैं। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

बाबा जी की सबसे खास बात उनकी विनम्रता मानी जाती है। जब कोई उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है, तो वह अपनी व्यक्तिगत महिमा का बखान करने के बजाय बाबा बालकनाथ जी की कृपा का उल्लेख करते हैं। उनके अनुयायियों के अनुसार, वह अक्सर कहते हैं कि जो कुछ भी होता है, बाबा बालकनाथ जी की कृपा से होता है।

‘मैं’ से दूरी, सेवा से नाता

बाबा साधु राम मसंद जी के व्यक्तित्व को एक पंक्ति में समझना हो तो उनका यह संदेश काफी कुछ कहता है—

“जिसको मैं की हवा लगी, उसको फिर न दुआ लगी और न ही दवा लगी।”

यह कथन अहंकार से दूर रहने, विनम्रता अपनाने और स्वयं को दूसरों से बड़ा न समझने की सीख देता है। हजारों श्रद्धालुओं के बीच भी अपनी भूमिका को ईश्वर की कृपा से जोड़कर देखना उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा का विषय है।

भविष्य के प्रति सचेत रहने और सही राह चुनने का संदेश

आश्रम में आने वाले अनेक श्रद्धालु बाबा जी से अपने जीवन की परेशानियों, परिवार की चिंताओं और भविष्य को लेकर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। उनके अनुयायी मानते हैं कि बाबा जी की आध्यात्मिक समझ और अनुभव उन्हें कठिन परिस्थितियों में सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।

आस्था, सेवा और विनम्रता का संदेश

नवरात्रि की नवमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि बाबा श्रद्धा सिद्ध भक्ति मंदिर एवं आश्रम टांडा (राजपुर) अनेक लोगों की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। बाबा साधु राम मसंद जी के प्रति श्रद्धालुओं का जुड़ाव, भंडारे की परंपरा और जरूरतमंदों की सहायता से जुड़े प्रयास इस आयोजन को विशेष बनाते हैं।

धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, सद्भाव, विनम्रता और मानवता को मजबूत करना भी है। बाबा जी के जीवन से जुड़ी यही बातें उनके अनुयायियों को आकर्षित करती हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती हैं कि सच्ची प्रतिष्ठा अहंकार में नहीं, बल्कि सेवा और अच्छे कर्मों में निहित है।

ट्राई सिटी टाइम्स की ओर से सभी श्रद्धालुओं को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

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