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warning alarm: *Religious demographic changes in India* Editorial by Mahendra Nath sofat ex minister Himachal Pradesh

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warning alarm: Religious demographic changes in India* Editorial by महेंद्र नाथ सोफत एक्स मिनिस्टर

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  1. 16 मई 2024– ( धर्म आधारित जनसंख्या का बढता असंतुलन।)- मेरे आज के ब्लॉग मे दिए गए आंकडो और जानकारियों का स्रोत प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक मे छपा एक लेख है। मेरी समझ मे धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन और धर्म परिवर्तन गभींर विषय है। अगर यह सब ऐसे ही चलता रहा तो हिन्दुस्तान की भविष्य की तस्वीर निश्चित तौर पर बदसूरत होने वाली है। धर्म निरपेक्षता के समर्थक इन आंकडो पर न बात करने को तैयार है और न ही इस विषय की गभींरता का संज्ञान लेने को तैयार है। खैर लेख का दावा कि आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा जारी धार्मिक अल्पसंख्यको की हिस्सेदारी के विश्लेषण और अध्ययन से पता चला है कि भारत मे हिन्दुओ की जनसंख्या मे गिरावट आई है। यह अध्ययन 1950 लेकर 2015 के बीच का है। स्मरण रहे कि 1950 मे बहुसंख्यक हिन्दू आबादी की हिस्सेदारी 84.68 प्रतिशत थी जो 2015 मे 78.06 प्रतिशत दर्ज की गई थी, अर्थात इसमे 7.82 प्रतिशत की कमी आई है। इस खंड काल मे मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 9.84 प्रतिशत से बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गई है। अर्थात 43.09 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ौतरी हुई है। आंकडो के अनुसार देश के 8 राज्यो और केन्द्र शासित प्रदेशो मे हिन्दु अल्पसंख्यक हो गए है। कई जिले मुस्लिम बहुल हो गए है। अभी हिमाचल मे स्थिति गंभीर नही है। हालांकि प्रवासी मुस्लिम समुदाय की यहां आने और बसने की गति काफी तेज हुई है। बहुत से काम धंधो मे उनका एकाधिकार होता जा रहा है। असली समस्या सीमावर्ती राज्यो मे है जहां इस समुदाय की जनसंख्या बढौतरी का एक माध्यम घुसपैठ भी है। इस सारे किस्से का एक दूसरा पहलू भी है कि जैसे- जैसे हिन्दुओ की संख्या घटेगी देश मे सेक्युलरिज्म की अवधारणा पर चोट पहुंचेगी। जहां जहां हिन्दु अल्पसंख्यक हुए वहां इनटाॅलरैंस बढी है। वहां हिन्दु मान्यताओ का विरोध होना शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल और केरल इसके उदाहरण है। मेरी समझ मे यदि किसी समुदाय की जनसंख्या समान्य तौर पर बढ रही है तो यह कोई गंभीर बात नही है। लेकिन आरोप है कि धर्म बचाने और बढाने के नाम पर एक योजनाबद्ध तरीके से आबादी बढाई जा रही है और घुसपैठ को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुछ धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करने वाली पार्टियां इस योजना की संरक्षक की भूमिका मे नजर आ रही है। यह बात काबिलेगौर है कि धर्म के नाम पर इस देश का एक विभाजन हो चुका है। जनसंख्या के बढने का अर्थ है हिस्सेदारी का बढना है। मेरे इस ब्लॉग का लिखने का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष का विरोध करना नही है। केवल पाठको को जनसंख्या असंतुलन के खतरे से अवगत करवाना और सावधान करना है।
    आज इतना ही।

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