कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के गेट नंबर 1 के बंद होने से लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी।


कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के गेट नंबर 1 के बंद होने से लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी।

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर का सरताज जिसकी वजह से पालमपुर आज तरक्की की राह पर अग्रसर है और यह विश्वविद्यालय पालमपुर की शान समझा जाता है। इसकी सुंदरता को निखारने में पूर्व कुलपतियों का अहम योगदान रहा जिनमें डॉ तेज प्रताप तथा डॉक्टर डॉ एच के चौधरी मुख्य रहे ।
हाईवे के साथ गेट नंबर 1 की एंट्री से लोग विश्वविद्यालय में जाते थे परंतु पिछले कुछ समय से इस गेट पर ताला लगा दिया गया है यह कुछ समय के लिए ही खोला जाता है उसके बाद इसे बंद रखा जाता है, जिससे यहां पर आने वाले लोगों को कंफ्यूजन तथा परिचित लोगों को परेशानी हो रही है विशेष रूप से कैंपस के अंदर रह रहे निवासियों को तथा पालमपुर से आने वाले विजिटर और पेंशन भोगियों को। क्योंकि गेट नंबर 1 से गाड़ी एंटर नहीं होती तो उन्हें अगर हेल्थ सेंटर जाना हो तो घूम कर अभी हाल ही में बनाए गए गेट से आना पड़ता है जिससे उन्हें लगभग ₹1100 मीटर का फालतू का सफर करना पड़ जाता है जिससे पेट्रोल की खपत बढ़ती है । एक विद्वान प्रोफेसर ने कहा कि आजकल ईरान इजरायल युद्ध के कारण वैसे ही तेल की बहुत दिक्कत आने वाली है तो इस तरह से इस गेट को बंद करके विदेशी मुद्रा का तो नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही लोगों को परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। ऐसा नहीं कि इस गेट को बंद करके यहां से सिक्योरिटी स्टाफ को हटा दिया गया है या पैसों के बचत की जा रही है ।परंतु लोगों को परेशानी जरूर हो रही है विशेष रूप से रिटायर्ड लोगों के लिए यह फालतू का सफर उन्हें खलता है।
क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस ओर कोई ध्यान देगा जब सिक्योरिटी स्टाफ वहाँ पर बैठा रहता है तो गेट बंद करने का क्या ओचित्य हुआ यह समझ से परे है।
स्थानीय लोगों और विश्वविद्यालय से जुड़े नागरिकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि गेट नंबर–1 को पहले की तरह नियमित रूप से खुला रखा जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी और अतिरिक्त दूरी तय करने से राहत मिल सके।



