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#Editorial :हिमाचल की बिगड़ती कानून व्यवस्था: शांत पहाड़ी प्रदेश का सुरक्षा कवच ध्वस्त

 

हिमाचल की बिगड़ती कानून व्यवस्था: शांत पहाड़ी प्रदेश का सुरक्षा कवच ध्वस्त

हिमाचल प्रदेश, जो पूरे देश में एक शांत और सुरक्षित पहाड़ी प्रदेश के रूप में जाना जाता था, आज कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के कारण चिंता का विषय बन गया है। हिमाचल की बिगड़ती कानून व्यवस्था ने शांत पहाड़ी प्रदेश को बिहार और उत्तर प्रदेश के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है। यह कोई संवेदनशील राजनीतिक बयानबाजी नहीं, लेकिन वास्तविकता है जो अपराध के आंकड़ों और दिन-प्रति-दिन बढ़ती घटनाओं से साफ झलकती है।
अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और प्रदेश पुलिस के आंकड़े गंभीर हैं। 2025 में कुल अपराधों में 6% की वृद्धि दर्ज हुई �। नशा तस्करी में 28% और दुष्कर्म के मामलों में 19% की वृद्धि ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया �। जनवरी 2025 में ही हिमाचल में 12 हत्याएं, 26 दुष्कर्म और 229 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए �।
2020 में हत्या के मामलों में 30% की वृद्धि पहले भी दर्ज हुई थी �। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी 1.3% की वृद्धि हुई �। ये आंकड़े वह नहीं हैं जो किसी सराहना के लिए हों, लेकिन ये सच हैं जो सरकार को सुनने चाहिए।
रोड रेज: रोज़मर्रा की त्रासदी
अाय दिन मारपीट, चोरी और रोड रेज की घटनाएं स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। शिमला में हाल ही में एक रोड रेज घटना सामने आई, जब हरियाणा के एक परिवार ने HRTC बस ड्राइवर को पीटा �। पांवटा में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कांस्टेबल के साथ रोड रेज में मारपीट हुई �।
हिमाचल में बीते 7 सालों में 20 हजार से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 8,370 लोगों अपनी जान गंवा चुके हैं �। साल 2022 में 2,597 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,032 लोगों की मौत हुई �।
गोपालपुर मामले में पुलिस की विफलता
एक उदाहरण दे रही हूं – गोपालपुर में गरीब चाय वाले के साथ उत्तर प्रदेश के पर्यटकों ने उसके टी स्टाल के सामने गाड़ी खड़ी करने के चलते विवाद में मारपीट की। नव नियुक्त जिला परिषद सदस्य नवी ठाकुर जब पुलिस स्टेशन मामला दर्ज करवाने पहुंची, तो पुलिस वालों ने उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा!
क्या ऐसे बनेगा लोगों का पुलिस पर भरोसा? क्या वो खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगे? यह घटना पुलिस की विफलता और जनता से दूरियों का स्पष्ट संकेत है।
नीरज भारती प्रकरण और मुख्यमंत्री की छवि
हिमाचल प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर नया राजनीतिक तूफान खड़ा हुआ जब पूर्व विधायक नीरज भारती ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया �। मुख्यमंत्री ने नीरज भारती के आरोपों को प्रतिक्रिया में कहा कि “नशेड़ी के बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए” �।
नीरज भारती प्रकरण में धूमिल हुई मुख्यमंत्री की छवि को चमकाने की अपेक्षा हिमाचल की छवि को सुधारने का प्रयास होता तो बेहतर था।
राज्यपाल और नेता प्रतिपक्ष की तल्ख टिप्पणी
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सीधे तौर पर कहा कि “मुझे भी लगता है कि हिमाचल में कानून व्यवस्था बिगड़ गई है” �। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाකुर ने भी कहा कि “प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरे तरीके से ध्वस्त है” और “हत्याओं के मामले तेजी से बढ़े हैं” �।
конgress के अनुराग ठाकुर ने भी हिमाचल में अपराध बढ़ने पर सरकार की आलोचना की �। कर्ण नंदा ने कहा कि “हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था ठप और सरकार मस्त है” �।
मुख्यमंत्री जी, थोड़ा ध्यान इस तरफ भी दो!
मुख्यमंत्री जी, थोड़ा ध्यान इस तरफ भी दो! प्रदेश में अपराधिक तत्वों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। अपने थानों से आंकड़े तो एकत्रित कीजिए कि रोड रेज की कितनी घटनाएं हुई हैं और कितने लोगों पर कार्रवाई हुई है।
हिमाचल एक छोटा राज्य है, जो पूरे देश में अपनी शांत कानून व्यवस्था के लिए जाना जाता था। अब जब अपराधिक तत्वों का बोलबाला बढ़ रहा है, मारपीट, चोरी और रोड रेज की घटनाएं स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं, तो यह सरकार के लिए गंभीर संकेत है।
पुलिस पर भरोसा वापस कैसे लौटे?
पुलिस पर लोगों का भरोसा तभी बनेगा जब वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। गोपालपुर में चाय वाले के साथ हुई घटना और पुलिस स्टेशन में जिला परिषद सदस्य को बार-बार चले जाने के लिए कहा जाना – यह सब दर्शाता है कि अब तदबीर की जरूरत है।
हिमाचल को फिर से उसकी शांत पहाड़ी प्रदेश की छवि वापस दिलानी होगी, न कि बिहार और उत्तर प्रदेश के समकक्ष लाकर खड़ा करना। devbhoomi (देवभूमि) अब crime land (अपराध क्षेत्र) बन रहा है �।
समाधान की दिशा
आंकड़ों का विश्लेषण: रोड रेज, मारपीट और चोरी की घटनाओं काDetail विश्लेषण करें
पुलिस अनुशासन: पुलिस स्टेशन में जनता के साथ व्यवहार सुधारें
कठोर कार्रवाई: अपराधिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई
सुरक्षा व्यवस्था: पहाड़ी प्रदेश की सुरक्षा को प्राथमिकता दें
हिमाचल की वर्तमान स्थिति सरकार के लिए चुनौती है। अगर कानून व्यवस्था को ठीक नहीं किया गया, तो हिमाचल की सुरक्षित छवि पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। यह समय केवल बयानबाजी का नहीं, लेकिन कठोर कार्रवाई और सुधार का है।
सुरक्षित हिमाचल की प्रतिष्ठा वापस लाना ही अब मुख्यमंत्री और सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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