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*City of Dreamz or city of grime*

Maintenance agencies केवल AMC लेने में अपना इंटरेस्ट शो करती हैं परंतु बाशिंदों को सुविधा देने के नाम पर हमेशा आनाकानी करती है पीछे भागती हैं :Rohit Sethi

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City of Dream or city of grime

सिटी ऑफ़ ड्रीम्स… नाम सुनते ही कल्पना होती है एक ऐसी जगह की जहाँ सुंदरता, शांति और खुशहाली का माहौल हो, जहाँ लोग सुरक्षित और सुकून से जीवन जी सकें। लेकिन सच्चाई यह है कि आज यह “सिटी ऑफ़ ड्रीम” कई निवासियों के लिए “सिटी ऑफ़ ग्राइम” बन चुकी है। यह बात समिति के पूर्व प्रधान और खरड़ भाजपा मंडल के उप प्रधान रोहित सेठी ने कही। उनका कहना है कि जिस सपने को बेचकर लोगों को यहां बसाया गया, वह सपना अब केवल सपनों में ही अच्छा लगता है, असलियत तो कुछ और ही कहानी कहती है।

स्थानीय निवासियों का दर्द यह है कि यहां भारी-भरकम मेंटेनेंस शुल्क चुकाने के बावजूद उन्हें गंदगी, अव्यवस्था और बदबू का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर oliva tower12 cricket ground के पास गंदगी का बड़ा ढेर पड़ा है, जिससे इतनी सड़ांध उठती है कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। बरसात के मौसम में यह गंदगी और भी खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि मच्छर, मक्खियाँ और अन्य संक्रमणजनित कीट पनपते हैं और बच्चों तथा बुजुर्गों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

रोहित सेठी ने कहा कि आज हालात इतने खराब हैं कि शरीफ और संस्कारी परिवारों को यहाँ रहना मुश्किल लगने लगा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इसे हुड़दंगबाज़ी और अपराध की शरणस्थली बना लिया है। रात को हुड़दंग और दिन में गंदगी व बदबू – यही इस समिति की कड़वी सच्चाई बन चुकी है।

मेंटेनेंस एजेंसी और बिल्डर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नज़र आते हैं। लोग पूछते हैं कि आखिर वे भारी-भरकम फीस किस लिए भरते हैं – ताकि उन्हें राहत मिले या ताकि उनकी परेशानियाँ और बढ़ें? सवाल यह भी है कि क्या मोहाली प्रशासन, शासन और समिति के सुंदर सपने दिखाने वाले लोग कभी इस हकीकत की तरफ ध्यान देंगे, या फिर केवल नाक पर रूमाल रखकर आगे बढ़ते रहेंगे।

ज़रूरत इस बात की है कि मेंटेनेंस एजेंसी अपनी जिम्मेदारी समझे और तुरंत प्रभाव से सफाई व व्यवस्था की ओर ध्यान दे। वरना “सिटी ऑफ़ ड्रीम्स” का सपना टूटकर बिखर जाएगा और यह जगह केवल गंदगी, अव्यवस्था और उपेक्षा की मिसाल बनकर रह जाएगी।

सोसाइटी को बने हुए 6 साल हो गए लेकिन अभी तक बाउंड्री वॉल नहीं लगी है टावर 3c में ब्लॉक्ड मैनहोल को भी ठीक करवाने की जरूरत है परंतु इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं। इतनी महंगी महंगी सोसाइटीज में रहने का क्या फायदा? लोग अपने जीवन भर की कमाई अपने चैन सुख और सुकून के लिए लगाते है परंतु मिलता उन्हें इसके विपरीत ही है ।राजनीतिक के लोग तथा शासन सब आंखें मूंदे बैठा रहता है लोगों की दिक्कतों की किसी को परवाह नहीं ऐसा रोहित सेठी और वहां के बाशिंदों ने बताया ।

असल में लोग राहत की सांस चाहते हैं, न कि बदबू और गंदगी के ढेर। सपनों के नाम पर खरीदी गई इस जगह को सच में “सिटी ऑफ़ ड्रीम्स” बनाने की जिम्मेदारी अब बिल्डरों और एजेंसियों को निभानी होगी।

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