*साहित्य के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल: सुदर्शन भाटिया, जिन्होंने हाथ से लिखी 810 किताबें*


साहित्य के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल: सुदर्शन भाटिया, जिन्होंने हाथ से लिखी 810 किताबें

एक सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, जिन्होंने अपने जीवन का उत्तरार्ध साहित्य सृजन और समाज सेवा में लगा दिया। यह कहानी है सुदर्शन भाटिया की, जिन्होंने न सिर्फ 810 पुस्तकों की रचना की, बल्कि उन्हें हाथ से लिखकर एक मिसाल कायम की। डिजिटल युग में जहां लेखन कुंजीपटल पर टाइप करने का पर्याय बन गया है, वहीं भाटिया जी ने कलम और स्याही से साहित्य की सेवा करते हुए एक अनूठी विरासत छोड़ी है।
जीवन परिचय: एक अभियंता से साहित्यकार तक का सफर
सुदर्शन भाटिया ने अपने जीवन की शुरुआत एक अभियंता के रूप में की। सेवानिवृत्ति के बाद जहां अधिकतर लोग आराम करना पसंद करते हैं, वहीं भाटिया ने इस अवधि को रचनात्मकता और सार्वजनिक सेवा का महायज्ञ बना दिया। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी अब तक की लिखी गई सभी पुस्तकें हाथ से लिखी गई हैं। यह कार्य उनके अनुशासन और बौद्धिक जुनून को दर्शाता है, जो आज के यांत्रिक युग में अत्यंत दुर्लभ है।
साहित्यिक उपलब्धियां: 810 पुस्तकें और 65 समाचार पत्रों में लेख
सुदर्शन भाटिया ने अब तक 810 हस्तलिखित पुस्तकों की रचना की है। यह उपलब्धि न सिर्फ राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर सराहनीय है। उनके द्वारा वितरित पुस्तकों की कुल संख्या 11 लाख 70 हजार से अधिक है, और वे इन्हें नि:शुल्क वितरित करते हैं।
उनकी रचनाएं विविध विषयों पर फैली हुई हैं:
· पौराणिक रचनाएँ: ‘त्रेतायुगीन कथाकोश’ और ‘द्वापरयुगीन कथाकोश’
· प्रेरणादायक एवं सामाजिक: ‘मेरा घर-मेरी शान’, ‘आधुनिक नारी किसी से कम नहीं’, ‘भारत हम सब का प्यारा’
· स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक चिकित्सा: ‘प्राकृतिक चिकित्सा रहें स्वस्थ’, ‘रोग और उनका घरेलू उपचार’
· बाल एवं अंतरिक्ष विज्ञान: ‘अंतरिक्ष – बाला कल्पना चावला’
इतना ही नहीं, सुदर्शन भाटिया के लेख देश भर के लगभग 65 समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
सामाजिक सरोकार: पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण
सुदर्शन भाटिया केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि एक समाज सेवक भी हैं। उन्होंने अपनी स्वर्गीय पत्नी श्रीमति जगदीश भाटिया की स्मृति में, अपनी अमूल्य पुस्तकों को स्कूलों, कॉलेजों, पुस्तकालयों और जरूरतमंद छात्रों को नि:शुल्क भेंट करने का संकल्प लिया है।
उनके साहित्यिक योगदान का अकादमिक जगत पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। भाटिया जी की पुस्तकों पर अब तक पांच छात्र एम.फिल कर चुके हैं, और कोल्हापुर के एक प्रोफेसर ने उनके कार्यों पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी अधिकांश पुस्तकें भारत के विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में सुरक्षित रखी गई हैं।
सुदर्शन भाटिया उस सच्चाई के प्रतीक हैं कि उम्र और व्यवसाय ज्ञान की प्यास और समाज सेवा में बाधक नहीं होते। एक अभियंता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर एक महान साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में सम्पन्न होता है।
यदि आप साहित्य प्रेमी हैं या आपके पास कोई पुस्तकालय है, तो भाटिया जी के इस महान अभियान का हिस्सा बनने के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं:
सुदर्शन भाटिया
आवास: नंबर 27, फ्रेंडन कालोनी, कैलेबी कालोनी, परिणय के पास
मोबाइल: 9805800494, 7807274375




