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*गुलाब से खिल जायेगा:-विनोद वत्स की कलम से*

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गुलाब से खिल जायेगा

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प्रेम दिवस पर प्रेम रस पर प्रेम से लिखी प्रेम रस की कविता का आनंद लीजिये।
अधरों को अधरों पे रख के प्रेयसी के अधरों से निकली प्रेम सुगन्ध का संगम कीजिये।
सब कीजिये लेकिन थोड़ा हमारी भी सुन लीजिये

पुष्प गुलाब का ,चॉकलेट, टेडीबियर दीजिये लेकिन थोड़ा सा अपने संस्कारो को बचा लीजिये।
किसी रेस्तरां या थियेटर में नज़रों से प्रेम का इजहार कीजिये।
खुले आम सड़को पे आवारा पन का घिनोना कृत न कीजिये प्रेम पर्दे की चीज़ है इसे बाजारू न बनाइये।
प्रेम कीजिये और प्रेम को किसी बंधन तक पहुंचाइये।
प्रेम का कोई धर्म नही होता फिर भी  झूठे मक्कारो से संभल जाइये।
पहले सही अता पता चल जाये तभी प्रेम की पींग बढ़ाइये
वरना एक छोटी सी मुलाकात को दिल मे ना बेठाइये।

और सबसे अच्छी कोशिश तो ये  हो उस दिन अपने माता पिता के संग मातृ पिता दिवस मनाइये।
उनके चरणों को छू कर उनका आशीर्वाद पाइये
बच्चो से स्नेह कीजिये गरीबो में  फल मिठाई बटवाईये।
सच देखना कितना आनंद आयेगा जब तुम्हारे थोड़े से स्नेह से उन जरूरत मंदों का चेहरा गुलाब सा खिल जायेगा।

विनोद वत्स की कलम से

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