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*कर्तव्यनिष्ठा और करुणा की मिसाल – डॉ. अंजना सभरवाल तुली*

डॉ अंजना सभरवाल तुली एक ऐसी चिकित्सक, जिनकी पहचान सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि इंसानियत रही।

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कर्तव्यनिष्ठा और करुणा की मिसाल – डॉ. अंजना सभरवाल तुली

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कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के स्वास्थ्य केंद्र में कभी डॉ. अंजना सभरवाल तुली की मौजूदगी हर मरीज के लिए ढांढस का कारण हुआ करती थी। 31 मार्च 2026 को वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुईं डॉ. तुली ने अपने लंबे कार्यकाल में जिस निष्ठा, संवेदनशीलता और पेशेवर सोच के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह विश्वविद्यालय परिवार के लिए हमेशा यादगार रहेगी।

डॉ. तुली के लिए डॉक्टर होना केवल नौकरी नहीं था, बल्कि एक जिम्मेदारी थी। उनका सबसे बड़ा सिद्धांत था कि हर मरीज के साथ एक जैसा व्यवहार हो। चाहे वह विश्वविद्यालय का कोई बड़ा अधिकारी हो या कोई नया आया छात्र, सभी को उनसे उतनी ही गरिमा और सम्मान मिलता था। वह किसी की निजी बातों को कभी बाहर नहीं आने देती थीं – यह उनकी चिकित्सा नैतिकता की सबसे बड़ी पहचान थी।

उनकी कार्यशैली में अनुशासन और समय की पाबंदी साफ दिखती थी। चिकित्सा से जुड़े हर नियम और प्रक्रिया का वह बखूबी पालन करती थीं। जब भी कोई आपात स्थिति आती, वह बिना घबराए पूरी समझदारी से काम लेती थीं। कोविड काल हो या मौसमी बीमारियों का दौर, डॉ. तुली ने हर बार वैज्ञानिक तरीके से और प्रशासनिक कुशलता के साथ परिसर की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने सिर्फ इलाज ही नहीं किया, बल्कि बीमारियों से बचाव के लिए हमेशा सही परामर्श देती रहीं।

लेकिन इन सबसे बढ़कर, डॉ. तुली के व्यक्तित्व में जो सबसे खास बात थी, वह थी उनकी सहानुभूति। वह हर मरीज को धैर्य से सुनती थीं, उनकी परेशानी को समझती थीं और बस दवा देकर नहीं छोड़ देती थीं। उनके पास आने वाला हर व्यक्ति महसूस करता था कि डॉक्टर साहिबा को उसकी फिक्र है। विश्वविद्यालय में दूर-दूर से पढ़ने आए छात्रों के लिए वह अपने घर जैसा सहारा थीं। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और उनके परिवार वालों के लिए वह परिवार की ही सदस्य थीं, जिन पर पूरा भरोसा किया जा सकता था। उनकी दवा के साथ हमेशा उनका धैर्य और उनकी स्नेहिल बातें भी मिलती थीं, जो कई बार दवा से भी ज्यादा असर करती थीं। 

डॉ. तुली के कार्यकाल की एक और विशेषता यह रही कि उन्होंने एक ऐसे वातावरण में अपनी सेवाएं दीं, जहां मरीज केवल सामान्य पृष्ठभूमि से ही नहीं, बल्कि अत्यंत शिक्षित वर्ग से भी संबंधित थे। आमतौर पर माना जाता है कि साधारण लोगों का इलाज करना अपेक्षाकृत सहज होता है, क्योंकि वे डॉक्टर की सलाह को सरलता से स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन किसी विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में, जहां पीएचडी धारक प्रोफेसर, वाइस चांसलर, डायरेक्टर और शोधार्थी मरीज के रूप में आते हैं, वहां चिकित्सा केवल उपचार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके प्रश्नों, जिज्ञासाओं और अपेक्षाओं को समझते हुए उन्हें संतुष्ट करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को डॉ. अंजना सभरवाल तुली ने पूरे धैर्य, ज्ञान और संतुलन के साथ बखूबी निभाया, जो उनकी पेशेवर दक्षता और व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है।

कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के लिए डॉ. अंजना सभरवाल तुली सिर्फ एक चिकित्सा अधिकारी नहीं थीं, वह एक भरोसे का नाम थीं। उन्होंने जिस मिसाल को स्थापित किया – जहाँ पेशेवर जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना साथ-साथ चलती है – उसे यह विश्वविद्यालय परिवार हमेशा याद रखेगा।

सेवानिवृत्ति के बाद भी डॉ. तुली का योगदान और उनकी अच्छाइयाँ इस परिसर में जीवित रहेंगी। ट्राई सिटी टाइम्स की ओर से उनको उनके उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की हार्दिक शुभकामनाएं।

बी के सूद चीफ एडिटर
ट्राई सिटी टाइम्स

 

 

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